देश ठप! 30 करोड़ मजदूरों की महा हड़ताल से फैक्ट्रियां बंद, सरकार पर बड़ा दबाव

मजदूर हड़ताल


केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में देशभर में 30 करोड़ से अधिक मजदूरों की बताई जा रही मजदूर हड़ताल ने व्यापक असर दिखाना शुरू कर दिया है। दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र संघों के संयुक्त मंच के आह्वान पर शुरू हुई इस आम हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा का भी समर्थन मिला है।

देश के कई राज्यों से कामकाज ठप होने और बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही हैं।


क्यों बुलाई गई महा हड़ताल?

ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि:

  • सरकार की नीतियां मजदूर विरोधी हैं।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण तेज हो रहा है।
  • श्रम कानूनों में बदलाव से कर्मचारियों की सुरक्षा कम हुई है।
  • महंगाई और बेरोजगारी पर ठोस कदम नहीं उठाए गए।

इन्हीं मुद्दों को लेकर 9 जनवरी को हुए राष्ट्रीय श्रमिक सम्मेलन में हड़ताल का फैसला लिया गया था।


किन-किन क्षेत्रों पर पड़ा असर?

हड़ताल का प्रभाव कई बड़े सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों में देखने को मिला:

  • SAIL की इकाइयां
  • NTPC
  • BHEL
  • कोल इंडिया की खदानें
  • विभिन्न औद्योगिक क्षेत्र

ट्रेड यूनियनों का दावा है कि सरकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र—तीनों में कामकाज प्रभावित हुआ है।


किन राज्यों से आईं खबरें?

हड़ताल का असर कई राज्यों में बताया जा रहा है, जिनमें प्रमुख हैं:

  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • झारखंड
  • असम
  • तमिलनाडु
  • पुडुचेरी
  • केरल
  • ओडिशा

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में प्रदर्शन और रैलियां आयोजित की जा रही हैं।


किसान संगठनों का समर्थन

संयुक्त किसान मोर्चा ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है। किसान संगठनों का कहना है कि:

  • मजदूर और किसान मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं।
  • कॉरपोरेट नीतियों का असर खेती और श्रम दोनों पर पड़ता है।

कई जगह किसान संगठनों ने ट्रेड यूनियनों के साथ संयुक्त प्रदर्शन किए।


क्या पड़ सकता है व्यापक असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हड़ताल लंबी चली तो:

  • औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
  • बिजली और खनन क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।
  • परिवहन और सप्लाई चेन बाधित हो सकती है।

हालांकि सरकार की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


आगे क्या?

ट्रेड यूनियनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस बातचीत नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

देशभर में चल रही यह मजदूर हड़ताल सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि श्रमिक अधिकारों को लेकर बड़ी राजनीतिक और सामाजिक बहस का संकेत बन चुकी है। आने वाले दिनों में इसका असर और व्यापक हो सकता है।

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