केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में गृह मंत्री ने कहा कि नक्सल एरिया में इसके खात्मे के लिए अंतिम प्रहार किया जाएगा और हम 2026 नक्सलवाद को खत्म कर देंगे, अगर अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है तो नक्सलवाद को खत्म करना होगा. इस बैठक में बिहार, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शामिल हुए. तो वहीं, आंध्र प्रदेश और झारखंड के मुख्यमंत्रियों की जगह बैठक में उनके प्रतिनिधि के रूप में मंत्रियों ने भाग लिया.
बैठक में गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री और उनके प्रतिनिधियों मंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि नक्सल एरिया में अंतिम प्रहार किया जाएगा. हम मार्च 2026 में नक्सलवाद खत्म कर देंगे. अगर अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है तो नक्सलवाद को खत्म करना होगा. LWE के सामने लड़ने के लिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रो में कानून को लागू करना जरूर है.
उन्होंने बताया कि 30 साल के बाद पहली बार वामपंथी उग्रवाद से मरने वाले लोगों की संख्या 100 से कम रही है. LWE से लड़ाई अब अपने अंतिम चरण में है. 2026 मार्च तक ये देश इस दशकों पुरानी समस्या से मुक्ति पा लेगा. LWE का 85% कैडर की ताकत छत्तीसगढ़ में सिमट कर रह गई है. आज 12 हेलिकॉप्टर 6 बीएसएफ और 6 एयरफोर्स के जवानों को बचाने के लिए तैनात हैं.
गृहमंत्री ने ये भी कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उनकी टीम को बधाई देना चाहता हूं कि अगस्त से अब तक लगभग 194 नक्सली मारे गए हैं जो युवा नक्सलवाद से आज भी जुड़े हैं. उनसे आग्रह है कि हिंसा छोड़िए और मुख्यधारा में शामिल हों. नक्सलवाद से किसी का भला नहीं होने वाला है. निर्माण क्षमता का एक संयुक्त अभियान हम चलाएंगे. करीब 3 गुना बजट SRE स्कीम का बढ़ा है जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए मुख्य योजना है.
अमित शाह के अनुसार, हिंसा की घटनाओं में करीब 53 फीसद की कमी आई है. नक्सली हिंसा से प्रभावित जिलों की संख्या 96 की जगह 42 जिले हुए हैं. इन 42 जिलों में से 21 जिले नए बने हैं यानी करीब 16 जिले ही नक्सल हिंसा से प्रभावित हैं. छत्तीसगढ़ की सफलता हम सबके लिए उत्साह भरी प्रेरणा लाई है. LWE के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार ने एक विशेष अभियान चलाया है. इस चुनाव में कई गांव ऐसे थे, जिन्होंने 30 साल के बाद इस बार आम चुनाव में वोट किया है. सुरक्षा बलों के साथ NIA को भी एक्टिव करके वित्तपोषण को रोकने के लिए आक्रामक रणनीति लागू की है. डिफेंसीव की जगह आक्रामक रणनीति अपनाई गई है. राज्य सरकारों से अपील है कि NIA की टीम को ट्रेनिंग के लिए अपने राज्य में बुलाएं.