छत्तीसगढ़ वन संरक्षण
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छत्तीसगढ़ वन संरक्षण को मिलेगी तकनीक की नई ताकत
छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ वन संरक्षण को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने अखिल भारतीय वन सेवा (IFoS) के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए आधुनिक तकनीकों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के लिए डिजिटल टूल्स और वैज्ञानिक पद्धतियों का इस्तेमाल बेहद आवश्यक हो गया है।
मंत्री श्री कश्यप ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए अपेक्षा जताई कि वे अपने प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और कौशल का उपयोग छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा के संरक्षण में करेंगे।
🌐 डीजीपीएस तकनीक से सटीक वन प्रबंधन
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं क्षेत्रीय निदेशक सुश्री स्तोविषा समझदार ने अधिकारियों को DGPS (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि:
- DGPS आधारित सर्वेक्षण से सटीक भौगोलिक डेटा संग्रह संभव होता है
- वन सीमांकन, सर्वेक्षण और प्रबंधन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है
- दीर्घकालिक संरक्षण योजनाओं के लिए यह तकनीक अत्यंत उपयोगी है
यह तकनीक वन क्षेत्रों में अतिक्रमण रोकने और योजनाओं को वैज्ञानिक आधार देने में सहायक सिद्ध हो रही है।
🐘 “गज संकेत” एप: हाथी संरक्षण का डिजिटल समाधान
उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप-निदेशक श्री वरुण जैन ने प्रशिक्षु अधिकारियों को “गज संकेत” मोबाइल एप्लिकेशन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एप हाथी संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रभावी डिजिटल टूल के रूप में कार्य कर रहा है।
गज संकेत एप की प्रमुख उपयोगिताएं:
- 🟢 हाथियों की मॉनिटरिंग और मूवमेंट ट्रैकिंग
- 🟢 मानव–हाथी संघर्ष प्रबंधन
- 🟢 त्वरित सूचना साझा करने की सुविधा
- 🟢 फील्ड स्तर पर डेटा एंट्री और प्रबंधन
प्रशिक्षु अधिकारियों को एप के व्यावहारिक उपयोग से भी अवगत कराया गया।
🎓 तकनीकी प्रशिक्षण से मजबूत होंगे भविष्य के अधिकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर वनमंडलाधिकारी बलौदाबाजार श्री धम्मशील गणवीर ने कहा कि इस प्रकार के तकनीकी एवं फील्ड आधारित प्रशिक्षण भावी वन सेवा अधिकारियों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि:
- आधुनिक तकनीक से संरक्षण कार्य अधिक प्रभावी बनते हैं
- डिजिटल टूल्स निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करते हैं
- वैज्ञानिक प्रबंधन से वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा मिलती है
🌿 बारनवापारा अभ्यारण्य का फील्ड भ्रमण
अधीक्षक बारनवापारा अभ्यारण्य श्री कृषानू चन्द्राकार ने प्रशिक्षु अधिकारियों को अभ्यारण्य की:
- भौगोलिक विशेषताएं
- पारिस्थितिक महत्व
- संरक्षण संबंधी प्रयासों
की जानकारी दी। साथ ही अधिकारियों को:
- वनभैंसा संरक्षण केंद्र
- ब्लैकबक रिलोकेशन एवं संरक्षण केंद्र
- ग्रासलैंड विकास क्षेत्र
का भ्रमण कराया गया, जिससे उन्हें संरक्षण कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।