बस्तर पंडुम
दंतेवाड़ा में जनजातीय संस्कृति का भव्य संगम
दंतेवाड़ा। बस्तर की आत्मा, उसकी परंपराएं और जनजातीय गौरव को संजोने के उद्देश्य से आयोजित बस्तर पंडुम का जिला स्तरीय एक दिवसीय आयोजन आज माँ दंतेश्वरी मंदिर के पावन प्रांगण में भव्य रूप से प्रारंभ हुआ। इस आयोजन ने बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और जनजातीय अस्मिता को एक मंच पर जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम में पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत, जनजातीय वेशभूषा, रीति-रिवाज और कला की झलक ने उपस्थित जनसमूह को बस्तर की जड़ों से जोड़ दिया। पूरा वातावरण ढोल-मांदर की थाप और लोकगीतों की गूंज से सराबोर रहा।
मुख्य अतिथि केदार कश्यप का भावनात्मक संबोधन
जिला स्तरीय बस्तर पंडुम के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य विभाग के मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि:
- बस्तर की संस्कृति और परंपरा हमारी पहचान है
- इसे सहेजना हम सभी का सामूहिक दायित्व है
- बस्तर आज बदलाव और विकास की नई राह पर अग्रसर है
उन्होंने गर्व के साथ कहा कि बस्तर अब देश-विदेश में अपनी नई सकारात्मक पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में बस्तर पंडुम जैसे आयोजन संस्कृति संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर हैं।
बस्तर: संस्कृति और पर्यटन का केंद्र
मंत्री श्री कश्यप ने बस्तर को पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध बताते हुए कहा कि:
- माँ दंतेश्वरी मंदिर
- ढोलकाल
- बारसूर
- चित्रकूट
- तीरथगढ़ जलप्रपात
जैसे स्थल बस्तर की पहचान हैं। बस्तर पंडुम के माध्यम से इन सांस्कृतिक और पर्यटन धरोहरों को विश्व पटल तक पहुँचाया जा रहा है। इस आयोजन में 12 विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं में प्रस्तुतियां दी जा रही हैं।
बदलता बस्तर: बंदूकों से ढोल-मांदर तक
अपने उद्बोधन में मंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में पहले हिंसा और भय का माहौल था, वहां आज लोकनृत्य और संगीत की गूंज सुनाई दे रही है। यह बस्तर के बदलते स्वरूप का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे पारंपरिक गीत जैसे “आया माचो दंतेश्वरी” और “साय रेला” को सोशल मीडिया के माध्यम से आगे बढ़ाएं।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की सहभागिता
कार्यक्रम में विधायक श्री चैतराम अटामी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नंदलाल मुड़ामी और कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव ने भी अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने बस्तर पंडुम को:
- सांस्कृतिक पहचान का सशक्त मंच
- नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने का माध्यम
- सामाजिक एकता और गौरव का प्रतीक
बताया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
कार्यक्रम की खास झलकियां रहीं:
- कुआकोंडा पोटाकेबिन-2 के छात्रों का रोमांचक मलखंभ प्रदर्शन
- ग्राम मोखपाल के नृत्य दलों की पारंपरिक प्रस्तुति
- ग्राम मड़से द्वारा ग्रामीण हाट-बाजार के जनजीवन का सजीव चित्रण
- जगदलपुर की बादल एकेडमी की मनमोहक प्रस्तुतियां
इसके साथ ही आकांक्षी जिला कार्यक्रम के अंतर्गत संपूर्णता अभियान की शपथ भी दिलाई गई।