कुछ घंटे में लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, जानें भारत में कितने बजे से होगा शुरू

साल का दूसरा व अंतिम सूर्य ग्रहण बुधवार, 2 अक्टूबर को यानी आज लग रहा है. यह सूर्य ग्रहण इसलिए और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पितृपक्ष की सर्वपितृ अमावस्या को पड़ रहा है. कन्या राशि और हस्त नक्षत्र में लगने जा रहा है यह सूर्य ग्रहण वलयाकार होगा, जो भारत में दर्शनीय नहीं होगा. हालांकि, इसका असर देश और दुनिया पर पड़ने वाला है. ऐसा हरि के द्वार यानी हरिद्वार के ज्योतिषाचार्य, पंडित शक्तिधर शास्त्री का कहना है. चलिए विस्तार से जानते हैं साल के आखिरी सूर्य ग्रहण का देश और दुनिया पर क्या और कैसा असर पड़ेगा. 

सूर्य ग्रहण 2 अक्टूबर की रात्रि लगभग 9:13 से शुरू होकर 3:17 तक रहेगा. यह ग्रहण बेशक भारत में दिखाई ना दे रहा हो, लेकिन यह विदेशों में दिखाई देगा. उत्तरी अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, न्यूजीलेंड और फिजी आदि जैसे देशों में यह सूर्य ग्रहण दिखाई देगा.

यह ग्रहण भारत में दर्शनीय नहीं है. ऐसे में यहां पर सूतक आदि नहीं लगेगा, न ही मंदिर के कपाट बंद होंगे. सभी मंदिरों में सामान्य रूप से पूजा आदि होगी.  मगर इस ग्रहण के दौरान ऐसा कोई कार्य करना निषेध है, जिसका दुष्प्रभाव आपके ऊपर पड़े. इसलिए इस दौरान मंत्रों का जाप आदि करना ही श्रेष्ठ माना गया है. 

पंडित शक्तिधर शास्त्री का कहना है कि 15 दिन के अंतराल में दो ग्रहण हो गए हैं. दरअसल, अबसे ठीक 15 दिन पहले भी ग्रहण हुआ था. वह चंद्र ग्रहण मीन राशि पर लगा था और यह सूर्य ग्रहण कन्या राशि में लग रहा है. ऐसे में इसका गहरा प्रभाव देखने को मिलेगा. 

ग्रहण के दौरान कोई भी व्यक्ति या बच्चे खासतौर से गर्भवती महिलाओं को इस बात का ध्यान रखना है कि वे उस समय कोई भी ऐसा काम न करें, जो उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है. इस दौरान सिलाई करने, सब्जी काटने और खाना बनाने से बचना है. इस दौरान केवल भगवान का चिंतन करें और सिर्फ पाठ-पूजा से संबंधित बातचीत करें. 

एक तो पितृ विसर्जन की अमावस्या और उस पर 15 दिन के अंदर दूसरा ग्रहण यानी सूर्य ग्रहण कल लगने जा रहा है. हालांकि, यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा मगर 15 दिन के अंदर दूसरा ग्रहण होना कहीं न कहीं विश्व में युद्ध की विभीषिका के बढ़ने की ओर इशारा कर रहा है. साथ ही प्राकृतिक और  अप्राकृतिक आपदाओं के बढ़ने की भी आशंकाओं का संकेत कर रहा है.

पंडित शक्तिधर शास्त्री का कहना है कि जब महाभारत का युद्ध हुआ था उस समय दो ग्रहण बहुत जल्दी-जल्दी हुए थे. ऐसे में विश्व में युद्ध की स्थिति बनती दिखेंगी. इस समय कई देशों के बीच युद्ध तांडव चल रहा है. हाल ही में लेबनान और इजरायल के युद्ध की चर्चा परम आवश्यक इसलिए है क्योंकि इसका ग्रहण का दुष्प्रभाव विश्व के पटल पर सभी को साक्षात देखने को मिल रहा है.

युद्ध की स्थितियों के साथ ही प्राकृतिक आपदाएं भी बढ़ेंगी. बाढ़ और लैंडस्लाइड्स की घटनाओं में इजाफा देखने को मिल सकता है. ग्रहण के दुष्प्रभावों में प्राकृतिक घटनाएं या अप्राकृतिक घटनाएं या राजनीतिक घटनाएं शामिल हैं. विदेशी सरकारों का गिरना, पलटना तथा राजनीतिक षड्यंत्र ऐसी स्थिति भी होती नजर आएंगी. सत्ता को लेकर जो संघर्ष होता है, इसका दुष्प्रभाव पूरे समाज पर देखने को मिलेगा.

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