तेंदुआ रेस्क्यू
कटघोरा वनमंडल की सतर्कता से बची एक अनमोल जान
छत्तीसगढ़ में तेंदुआ रेस्क्यू का एक साहसिक और सफल अभियान सामने आया है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मार्गदर्शन में कटघोरा वनमंडल ने पाली परिक्षेत्र में फंदे में फंसे एक युवा तेंदुए को सुरक्षित बचाकर वन्यजीव संरक्षण की दिशा में मजबूत संदेश दिया है।
इस अभियान को वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया। विभाग की त्वरित कार्रवाई, आधुनिक तकनीक और टीमवर्क ने इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
रात 9 फरवरी: जब मिली सूचना
9 फरवरी की रात पाली परिक्षेत्र के लाफा बीट से सूचना मिली कि एक तेंदुआ शिकारी के लगाए क्लच वायर के फंदे में फंस गया है।
सूचना मिलते ही:
- वनमंडलाधिकारी कुमार निशांत के नेतृत्व में विशेष टीम गठित
- दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में तत्काल रवाना
- आक्रामक स्थिति के बावजूद रेस्क्यू का निर्णय
स्थिति बेहद संवेदनशील थी, क्योंकि घायल तेंदुआ किसी भी समय आक्रामक हो सकता था।
साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन
उच्च अधिकारियों की अनुमति के बाद बिलासपुर से पशु चिकित्सक डॉ. चंदन और उनकी टीम को बुलाया गया।
ऑपरेशन की मुख्य बातें:
- रात लगभग 10:40 बजे तेंदुए को ट्रैंकुलाइज किया गया
- कुछ ही मिनटों में फंदे से सुरक्षित बाहर निकाला गया
- मौके पर प्राथमिक उपचार
- बेहतर इलाज के लिए कानन पंडारी भेजा गया
टीम की सूझबूझ और वैज्ञानिक पद्धति ने एक बड़ी दुर्घटना को टाल दिया।
डॉग स्क्वाड की मदद से आरोपी गिरफ्तार
अगले दिन अचानकमार टाइगर रिजर्व से डॉग स्क्वाड टीम को बुलाया गया।
जांच के दौरान:
- घटनास्थल से अहम सुराग जुटाए गए
- आरोपी के घर तक पहुंच बनाई गई
- शिकार में उपयोग किए गए तार और सामग्री बरामद
- आरोपी विजय कुमार गोंड ने अपराध स्वीकार किया
इसके बाद उसे न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया।
स्वस्थ होने के बाद जंगल में छोड़ा गया
उपचार के बाद जब तेंदुए की स्थिति में सुधार हुआ, तो विशेषज्ञों की सलाह पर उसे पुनः जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
छोड़ने से पहले:
- एंटी-स्नेयर वॉक अभियान चलाया गया
- अन्य संभावित फंदों की जांच
- ट्रैप कैमरों से निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई
यह कदम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वन्यजीव अपराधियों को कड़ा संदेश
इस तेंदुआ रेस्क्यू अभियान ने यह साबित कर दिया कि राज्य में वन्यजीव संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है।
वन विभाग की सफलता के प्रमुख कारण:
- त्वरित प्रतिक्रिया
- वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीक का उपयोग
- विभागीय समन्वय
- सख्त कानूनी कार्रवाई
इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि वन्यजीव अपराध अब किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।