“महाकाल की नगरी में शिवभक्ति का महाकुंभ: उज्जैन में श्रीमहाकाल महोत्सव का भव्य आगाज, CM डॉ. मोहन यादव करेंगे शुभारंभ”

श्रीमहाकाल महोत्सव


श्रीमहाकाल महोत्सव: आस्था, कला और संस्कृति का दिव्य संगम

बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन एक बार फिर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से सराबोर होने जा रही है। आज से उज्जैन में पांच दिवसीय श्रीमहाकाल महोत्सव का भव्य शुभारंभ हो रहा है, जिसका उद्घाटन आज शाम 7 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। यह महोत्सव श्रीमहाकाल महालोक और त्रिवेणी संग्रहालय परिसर में आयोजित किया जा रहा है।

इस आयोजन का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियां नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, शिव तत्व और सांस्कृतिक चेतना से जनमानस को जोड़ना है।


महोत्सव की खास बातें

श्रीमहाकाल महोत्सव 14 से 18 जनवरी तक चलेगा और इसमें कला, संस्कृति, संगीत और वैचारिक विमर्श का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि यह महोत्सव:

  • हमारी जड़ों और मूल्यों से साक्षात्कार कराएगा
  • शिव भक्ति के माध्यम से भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाएगा
  • देश-विदेश से आए कलाकारों और श्रद्धालुओं को जोड़ने का माध्यम बनेगा

उद्घाटन संध्या: शंकर महादेवन की शिव आराधना

महोत्सव की पहली शाम को शिवभक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा:

  • सुप्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन
  • अपने पुत्रों सिद्धार्थ और शिवम् के साथ
  • शिवोऽहम्” थीम पर संगीतमय प्रस्तुति देंगे

यह प्रस्तुति शिव आराधना, संगीत और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा अनुभव कराएगी।


पांच दिन, पांच रंग: कार्यक्रमों की झलक

महोत्सव के प्रत्येक दिन अलग-अलग सांस्कृतिक रंग देखने को मिलेंगे:

  • 15 जनवरी:
    • मुंबई का प्रसिद्ध द ग्रेट इंडियन क्वायर
    • विषय – “शिवा
  • 16 जनवरी:
    • सुप्रसिद्ध गायिका सोना महापात्रा की प्रस्तुति
  • 17 जनवरी:
    • इंदौर के श्रेयश शुक्ला
    • मुंबई के विपिन अनेजा और उनका बैंड
  • 18 जनवरी (समापन):
    • इंडोनेशिया और श्रीलंका के सांस्कृतिक दल
    • भगवान शिव पर आधारित नृत्य-नाटिका

लोकसंस्कृति और जनजातीय परंपराओं की झलक

हर दिन शाम 4 से 6 बजे तक त्रिवेणी संग्रहालय में मध्यप्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें शामिल हैं:

  • छिंदवाड़ा का भड़म नृत्य
  • बैतूल का ठाट्या
  • धार का भगोरिया
  • सागर का बरेदी

इसके साथ ही प्रतिदिन शहर के विभिन्न मार्गों से एक कला यात्रा निकलेगी, जिसमें:

  • शिव बारात
  • डमरू वादन
  • मलखंब
  • लोक कलाकारों की जीवंत प्रस्तुतियां

श्रीमहाकाल महालोक तक पहुंचेंगी।


अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी भी होगी आयोजित

15 जनवरी की सुबह एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, जिसका विषय होगा:

“शिव तत्त्व और महाकाल: पुरातिहास, साहित्य और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में”

इस संगोष्ठी में देश-विदेश के विद्वान शिव तत्त्व की दार्शनिक गहराइयों पर विचार साझा करेंगे।

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