पूना मारगेम योजना
बस्तर में बदलाव की नई शुरुआत
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पट्टिलिंगम ने हाल ही में कहा कि “पूना मारगेम (पुनर्वास से पुनर्जीवन)” अब केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि बस्तर में स्थायी शांति, सम्मानजनक जीवन और समग्र विकास का मजबूत आधार बन चुकी है। यह पहल उन लोगों के लिए आशा की किरण बनकर सामने आई है, जो वर्षों से हिंसा, डर और उपेक्षा के साए में जी रहे थे।
क्या है पूना मारगेम योजना?
पूना मारगेम का अर्थ है पुनर्वास के माध्यम से नया जीवन। यह योजना मुख्य रूप से उन नक्सल प्रभावित युवाओं और परिवारों के लिए है, जो हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं।
इस पहल के प्रमुख उद्देश्य हैं:
- शांति और विश्वास का वातावरण बनाना
- आत्मसमर्पण करने वालों का सुरक्षित पुनर्वास
- शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के अवसर
- स्थानीय समुदायों को विकास से जोड़ना
सरकार और सुरक्षा बलों की साझा प्रतिबद्धता
आईजी सुन्दरराज पट्टिलिंगम ने स्पष्ट किया कि इस मिशन में कई संस्थाएं मिलकर काम कर रही हैं, जिनमें शामिल हैं:
- भारत सरकार
- छत्तीसगढ़ शासन
- दंतेवाड़ा पुलिस
- सीआरपीएफ
- स्थानीय प्रशासन
इन सभी का लक्ष्य एक ही है—बस्तर को भय से मुक्त कर विकास का केंद्र बनाना।
जमीन पर दिखने लगे हैं सकारात्मक परिणाम
पूना मारगेम योजना के चलते बस्तर में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं:
- आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को सम्मानजनक जीवन मिल रहा है
- बच्चों की स्कूलों में वापसी बढ़ी है
- गांवों में स्वास्थ्य, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं
- स्थानीय लोगों में पुलिस और प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है
समावेशी विकास की ओर बस्तर
यह पहल केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समावेशी विकास इसका सबसे बड़ा आधार है। आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और पहचान का सम्मान करते हुए विकास योजनाओं को लागू किया जा रहा है। इससे लोगों को यह महसूस हो रहा है कि वे भी विकास की मुख्यधारा का हिस्सा हैं।
क्यों बन रही है यह योजना मिसाल?
पूना मारगेम को खास बनाता है इसका मानवीय दृष्टिकोण। यहां जोर सजा पर नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास पर है। यही कारण है कि यह योजना नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए रोल मॉडल बनती जा रही है।