कोलकाता के जिस आरजी कर अस्पताल में युवा महिला डॉक्‍टर की रेप के बाद हत्‍या कर दी गई, उनके नाम की प्‍लेट आज भी उनके चैंबर के बाहर लगी हुई है

आजी कर अस्‍पताल में डॉक्‍टर की रेप के बाद हत्‍या कर दी गई.घटना से नाराज देश भर के डॉक्‍टर इस वक्‍त हड़ताल पर हैं. न्‍यूज18 की टीम ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर डॉक्‍टर्स से बात की.

कोलकाता के जिस आरजी कर अस्पताल में युवा महिला डॉक्‍टर की रेप के बाद हत्‍या कर दी गई, उनके नाम की प्‍लेट आज भी उनके चैंबर के बाहर लगी हुई है. हालांकि अब उसे वाइट पेपर से ढक दिया गया है. न्‍यूज18 की टीम ने वहां मौजूद कुछ लोगों से बात की, जिन्‍होंने कई अहम जानकारियां दी. अस्‍पताल में ही काम करने वाले एक डॉक्‍टर ने बताया, ‘वो खुले दिल वाली बहुत अच्छी डॉक्टर थी और पूरे इतमिनान से पेशेंट्स की समस्‍याओं को सुनती थी.’ यह भावना वहां मौजूद अन्‍य डॉक्‍टर्स की भी थी. लोगों का कहना है कि अफसोस की बात है कि हमने एक होनहार डॉक्‍टर को खो दिया है.

बताया गया कि आरजी कर अस्‍पताल की यह डॉक्‍टर जिस इलाके में रहती थी वहां सप्ताह में दो से तीन दिन मरीजों का इलाज करती थी. युवा डॉक्टर की मौत पर दुख के साथ-साथ पूरे इलाके में दबा हुआ गुस्सा भी देखने को मिला. आरोपी को सख्‍त से सख्‍त सजा देने की मांग करते हुए कुछ लोगों ने कहा कि अस्‍पताल के मशहूर मेडिकल हॉल के डॉक्टरों की लिस्‍ट में उनका भी नाम था. अब उनके नाम को वाइट पेपर से ढक दिया गया है.


पड़ोस के चैंबर में बैठने वाले एक डॉक्‍टर ने बताया, ‘मैं अपने चैंबर में काफी देर तक बैठा रहता था. पढ़ाई के दबाव के कारण वह पहले साल नहीं बैठीं. बाद में उन्होंने नियमित रूप से मरीजों को देखा. वह प्रतिदिन शाम 4 बजे से मरीजों को देखती थी. उनका व्यवहार बहुत अच्छा था. हम उनकी मौत की खबर सुनकर निराश हैं. वो कभी-कभी मुझसे बात करती थे. हम सोच भी नहीं सकते कि उनके साथ कुछ ऐसा भी हो सकता है. मुझे उनकी मौत की खबर सुनकर बहुत बुरा लगा. हम भी उनके लिए न्याय चाहते हैं. अपराधी को सजा दो.’


डॉक्‍टर चाचा के नाम से मशहूर शख्‍स ने बताया आरजी कर अस्‍पताल में जान गंवाने वाली डॉक्‍टर जनरल फिजिशियन के तौर पर प्रैक्टिस कर रही थी. उन्हें पौधों और जानवरों से खास प्‍यार था. इलाके के कुत्तों को वो नियमित रूप से खाना दिया करती थी. उन्‍होंने इस साल घर पर ही दुर्गा पूजा मनाई. खूब खरीदारी भी की. घर के बड़े-बूढ़े प्यार से उन्‍हें ‘डॉक्टर साहब’ कहकर बुलाते थे. वो मरीजों को बड़े धैर्य से सुनती थी, इसलिए वो उनसे प्रभावित थे

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