वो खिलाड़ी जिसने फैंस को दौड़ाकर मारा था थप्पड़, चोटिल होने के बावजूद भारत को बनाया था विश्व विजेता

 टीम इंडिया के दिग्गज बल्लेबाज और क्रिकेट प्रेमियों के बीच ‘कर्नल’ के नाम से मशहूर दिलीप वेंगसरकर आज 6 अप्रैल 2026 को अपना 70वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका जन्म 6 अप्रैल 1956 को महाराष्ट्र के राजापुर में हुआ था। वेंगसरकर का क्रिकेट करियर 20 साल की उम्र में शुरू हुआ। 24 जनवरी 1976 को उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया और फरवरी में वनडे में भी कदम रखा। तेजतर्रार बल्लेबाज होने के साथ-साथ वे मैदान पर अनुशासन और साहस के लिए भी मशहूर थे।

वेंगसरकर का क्रिकेट करियर साहस और प्रतिभा का प्रतीक रहा है। उन्होंने 116 टेस्ट मैचों में 6868 रन बनाए, जिसमें 17 शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं। वनडे में 129 मैच खेलते हुए उन्होंने 3508 रन बनाए और एक शतक लगाया। लॉर्ड्स स्टेडियम में उनका प्रदर्शन अब भी यादगार है, जहां उन्होंने 4 टेस्ट मैचों में 500 रन बनाए और 3 शतक जड़े। यह रिकॉर्ड डॉन ब्रैडमैन से लेकर सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली तक कोई नहीं तोड़ पाया।

दिलीप वेंगसरकर को ‘कर्नल’ उपनाम लाला अमरनाथ ने दिया था। 1975 की ईरानी ट्रॉफी में वेंगसरकर ने शेष भारत के खिलाफ बॉम्बे की ओर से शानदार शतक बनाया। इस दौरान उनकी खेल शैली देखकर अमरनाथ ने उन्हें कर्नल सीके नायडू से तुलना की और तभी से यह उपनाम उन्हें मिला।

सिर्फ खेल ही नहीं, उनके साहसिक कारनामे भी फैंस के लिए यादगार रहे। साल 1994 में वानखेड़े स्टेडियम में कुछ फैंस मैच के दौरान उन्हें परेशान कर रहे थे। वेंगसरकर ने स्टैंड्स से दौड़ लगाकर उन फैंस को पकड़ लिया और थप्पड़ मारकर सबको चौंका दिया। यह घटना क्रिकेट इतिहास की एक मजेदार और साहसिक कहानी बन गई।

वेंगसरकर का क्रिकेट सफर लंबे समय तक प्रेरणा का स्रोत रहा। 1983 वर्ल्ड कप में चोट लगने के बावजूद उन्होंने टीम के लिए योगदान दिया। 1980 के दशक में वे दुनिया के नंबर वन बल्लेबाज बने और अपनी कड़ी मेहनत, धैर्य और तकनीक से क्रिकेट की दुनिया में अमिट छाप छोड़ी। आज 70 साल की उम्र में भी दिलीप वेंगसरकर भारतीय क्रिकेट के लिए एक प्रेरणा बने हुए हैं। उनके खेल, साहस और अनुशासन की कहानियां आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरक रहेंगी।

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