दिल्ली एम्स में भर्ती एमपॉक्स के संदिग्ध मरीज की रिपोर्ट नेगेटिव आई है.

अभी व्यक्ति को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है.

एम्स सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि दिल्ली एम्स में भर्ती Mpox संक्रमण के रोगी को जांच रिपोर्ट निगेटिव पाया गया है. हालांकि, अभी व्यक्ति को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है.

सूत्रों ने यह भी बताया कि एमपॉक्स मामलों या संक्रमण के संदिग्ध मामलों के लिए मुख्य रूप से सफदरजंग अस्पताल को नामित किया गया है.

बीते दिनों स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि जून 2022 से मई 2023 के बीच भारत में एमपॉक्स के 30 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से अधिकांश विदेशी थे. उन्होंने यह भी कहा कि इस नए स्ट्रेन से मौत की संभावना पिछले स्ट्रेन की तुलना में अधिक है. एक अधिकारी ने बताया, “जिन्होंने चेचक का टीका लिया है, वे संक्रमित नहीं होंगे. अभी तक किसी नए टीके की जरूरत नहीं है.”

एमपॉक्स एक वायरल बीमारी है जो मंकीपॉक्स वायरस के कारण होती है.  ये ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस की एक प्रजाति है. एमपॉक्स को पहले मंकीपॉक्स के नाम से जाना जाता था. इस वायरस की पहचान पहली बार 1958 में की गई थी. उस वक्त बंदरों में इस बीमारी का प्रकोप काफी ज्यादा बढ़ गया था.  Mpox वायरस का संबंध चेचक, काउपॉक्स, वैक्सीनिया जैसी बीमारियों से है. यह वायरस उसी ऑर्थोपॉक्स वायरस के परिवार से है जिसमें बाकी सभी पॉक्स वायरस हैं. एमपॉक्स वायरस बंदरों में फैलने वाला एक संक्रमण है, इसीलिए इसे मंकीपॉक्स वायरस कहा जा रहा है. संक्रमित जानवर के संपर्क में आने से यह वायरस इंसानों में भी फैलता है.

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