15 जनवरी को देशभर में गूंजेगा संकल्प – बाल विवाह मुक्त भारत अभियान में उत्तर बस्तर कांकेर बनेगा मिसाल

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान


बाल विवाह मुक्त भारत अभियान: एक मजबूत पहल

भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के निर्देशानुसार 27 नवम्बर 2025 से 08 मार्च 2026 तक 100 दिनों का बाल विवाह मुक्त भारत अभियान पूरे देश में संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज से बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से समाप्त करना और बच्चों, विशेषकर बालिकाओं के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करना है।

इसी कड़ी में उत्तर बस्तर कांकेर जिले में 15 जनवरी को दोपहर 12 बजे एक ऐतिहासिक शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जो जन-जागरूकता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


15 जनवरी को क्या होगा खास?

15 जनवरी को जिले के हर कोने में एक साथ बाल विवाह के खिलाफ आवाज बुलंद की जाएगी। इस दिन:

  • सभी विद्यालयों और कॉलेजों में छात्र-छात्राएं शपथ लेंगे
  • स्वास्थ्य केन्द्रों और छात्रावासों में अधिकारी एवं कर्मचारी भाग लेंगे
  • पुलिस थानों और न्यायालयों में कानून व्यवस्था से जुड़े अधिकारी संकल्प दोहराएंगे
  • आंगनबाड़ी केन्द्रों में कार्यकर्ता एवं लाभार्थी शामिल होंगे

यह आयोजन यह संदेश देगा कि बाल विवाह केवल सामाजिक नहीं, बल्कि कानूनी अपराध भी है।


कलेक्टर का स्पष्ट निर्देश

उत्तर बस्तर कांकेर के कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने जिले के सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि:

  • 15 जनवरी को अनिवार्य रूप से शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया जाए
  • कार्यक्रम की फोटोग्राफ्स सुरक्षित रखी जाएं
  • उपस्थित प्रतिभागियों की संख्या का विवरण तैयार किया जाए
  • संपूर्ण पालन प्रतिवेदन समय पर भेजा जाए

इससे यह सुनिश्चित होगा कि अभियान केवल औपचारिकता न रहकर वास्तविक जन आंदोलन बने।


बाल विवाह क्यों है गंभीर समस्या?

बाल विवाह के दुष्परिणाम बेहद गंभीर हैं, जैसे:

  • बच्चों की शिक्षा अधूरी रह जाती है
  • बालिकाओं के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है
  • घरेलू हिंसा और गरीबी का खतरा बढ़ता है
  • देश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति बाधित होती है

इसीलिए बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी गई है।


समाज की भूमिका सबसे अहम

सरकार के प्रयास तभी सफल हो सकते हैं जब समाज का हर वर्ग इसमें सक्रिय भूमिका निभाए। इस अभियान के माध्यम से:

  • माता-पिता को जागरूक किया जा रहा है
  • युवाओं को अपने अधिकारों की जानकारी दी जा रही है
  • समुदाय स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत की जा रही है


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