एलि कोहेन (Eli Cohen) इजरायल के इतिहास में एक ऐसा नाम है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। एली कोहेन की प्रतिष्ठा न केवल जासूसी की दुनिया में है, बल्कि उनकी कुर्बानी और बहादुरी ने इजरायल की सुरक्षा और कूटनीति में गहरा प्रभाव डाला। 1960 के दशक में सीरियाई सरकार के ऊपरी हलकों में उनकी घुसपैठ और इजरायल को दी गई महत्वपूर्ण जानकारियां आज भी जासूसी की दुनिया में एक अविस्मरणीय अध्याय के रूप में देखी जाती हैं। आज इजरायल एक साथ कई देशों से जंग लड़ रहा है। लेकिन इस यहूदी देश के लिए ऐसा पहली बार नहीं है। इसने पहले भी एक साथ कई मुस्लिम देशों से जंग लड़ी और विजय हासिल की। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजहों में से एक उसका जासूसी तंत्र का बेहद मजबूत होना था। आज हम एलि कोहेन के बारे में जानेंगे जिनकी कहानी बताती है कि मिडल ईस्ट में जासूसी और जानकारी का महत्व कितनी बड़ी भूमिका निभाता है।
एलि कोहेन का जन्म 1924 में मिस्र के अलेक्जेंड्रिया में यहूदी माता-पिता के घर हुआ था। वह एक बुद्धिमान और जुनूनी युवा थे, जो शुरू से ही राजनीति और सामरिक मामलों में रुचि रखते थे। 1949 में इजरायल की स्थापना के बाद, उनके परिवार ने इजरायल की ओर पलायन किया। वहां एलि को इजरायली सेना की खुफिया एजेंसी, मोसाद (Mossad), में काम करने का मौका मिला। उनकी भाषा पर पकड़, विशेष रूप से अरबी और फ्रेंच में दक्षता, और उनके समझदारी भरे दृष्टिकोण ने उन्हें एक शानदार जासूसी कैंडिडेट बना दिया।
1961 में, कोहेन को एक खतरनाक और बेहद गुप्त मिशन के लिए तैयार किया गया। उन्हें सीरियाई अमीरों के समाज में घुसपैठ करने और इजरायल के लिए महत्वपूर्ण सैन्य जानकारी एकत्र करने का काम सौंपा गया। उन्होंने खुद को “कमाल अमीन थाबेत” के रूप में पेश किया। एली कोहेन एक धनी और प्रभावशाली व्यापारी बनकर सीरिया गए। उन्होंने खुद के बारे में बताया कि वह अर्जेंटीना से सीरिया लौटे थे। उन्होंने सीरिया के सैन्य और राजनीतिक अधिकारियों के साथ संबंध स्थापित किए। वे सभी एली कोहेन को अपने एक करीबी साथी के रूप में मानने लगे।
सीरिया में रहते हुए, एलि कोहेन ने इजरायल को सीरिया की कई महत्वपूर्ण सैन्य जानकारियां दीं। उन्होंने सीरियाई गोलन हाइट्स पर स्थायी सैन्य ठिकानों की स्थिति और उनकी सुरक्षा योजनाओं की जानकारी इजरायल को दी, जो 1967 के छह दिवसीय युद्ध में इजरायल की महत्वपूर्ण विजय में सहायक साबित हुई। उन्होंने सीरियाई राजनेताओं और सेना के अधिकारियों के साथ गहरे संबंध बनाए, जिससे वह गोपनीय बैठकों और सैन्य बातचीत में भाग लेने में सक्षम हुए। उनकी इस गुप्त भूमिका ने इजरायल की सामरिक स्थिति को मजबूत किया और उसे अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई।
1965 में, कोहेन की जासूसी गतिविधियों का पर्दाफाश हो गया। सीरियाई खुफिया विभाग ने उनके रेडियो सिग्नल को पकड़ने में सफलता प्राप्त की, जिसके माध्यम से वह इजरायल को संदेश भेजा करते थे। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और सीरियाई अदालत में मुकदमा चलाया गया। मई 1965 में उन्हें राजधानी दमिश्क में एक चौराहे पर फांसी पर लटका दिया गया। कई दिनों तक उनकी लाश उसी चौराहे पर लटकी रही। उनकी मौत से इजरायल में भारी शोक की लहर दौड़ गई, लेकिन उनका बलिदान कभी नहीं भुलाया गया। ऐसा कहा जाता है कि एलि कोहेन के पकड़े जाने के बाद पूरे मिडिल-ईस्ट में तहलका मच गया था। इजरायल के दुश्मन देश मोसाद की पहुंच से खौफ खाने लगे थे कि अब उनके एजेंट सरकार में अंदर तक पहुंचने लगे हैं।
आज भी एलि कोहेन को इजरायल में एक नायक के रूप में देखा जाता है। उनकी कहानी न केवल बहादुरी और बलिदान की मिसाल है, बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे एक व्यक्ति की जानकारियां एक पूरे देश की रक्षा कर सकती हैं। इजरायल के लिए कोहेन का बलिदान एक स्थायी प्रतीक बन चुका है, और उनका नाम मिडल ईस्ट की जासूसी के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। एली कोहेन के जीवन पर एक ड्रामा सीरीज भी बनी है। नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध The Spy सीरीज एली कोहेन पर आधारित है।
आज जब इजरायल और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है, तब कोहेन की कहानी और भी प्रासंगिक हो जाती है। दोनों देशों के बीच प्रमुख मुद्दे परमाणु कार्यक्रम, सीरिया में ईरानी प्रभाव, और आतंकवाद के समर्थन से जुड़े हुए हैं। इजरायल, ईरान के परमाणु हथियारों की प्राप्ति को अपनी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है, जबकि ईरान इजरायल को क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण मानता है। इस माहौल में, जासूसी और खुफिया जानकारी का महत्व बढ़ गया है, जैसा कि कोहेन के समय में था।
ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने एक बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि ईरान में इजरायली जासूसी का मुकाबला करने वाले एक खुफिया इकाई के प्रमुख खुद इजरायली जासूस थे। अहमदीनेजाद ने यह जानकारी देते हुए कहा कि 2021 तक यह स्पष्ट हो गया था कि ईरान में इजरायल की खुफिया गतिविधियों से निपटने के लिए जिम्मेदार सबसे वरिष्ठ व्यक्ति असल में मोसाद का एजेंट था।
CNN Turk को दिए गए एक इंटरव्यू में, अहमदीनेजाद ने कहा, “इजरायल ने ईरान के भीतर जटिल ऑपरेशनों का आयोजन किया। वे आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकते थे। आज भी ईरान में इस पर चुप्पी साधी हुई है। जिस व्यक्ति को ईरान में इजरायल के खिलाफ खुफिया कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वह इजरायली एजेंट था।” यह खुलासा ईरान की सुरक्षा एजेंसियों और सरकार के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है, क्योंकि इस तरह की जासूसी से देश की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया संचालन पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
कुल मिलाकर जासूसी की दुनिया में इजरायल और उसके एजेंट एलि कोहेन की कहानी बताती है कि मिडल ईस्ट में राजनीति और सुरक्षा मामलों में जासूसी की कितनी अहम भूमिका है। इजरायल और ईरान के बीच आज के तनाव में भी, खुफिया जानकारी, रणनीतिक योजनाएं, और जासूसी गतिविधियां महत्वपूर्ण हैं।