नेशनल टास्क फोर्स के फैसले का स्वागत सरकार की तरफ से भी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बदलाव लिए एक और रेप का इंतजार नहीं किया जा सकता। ऐसे में तुरंत टास्क फोर्स तैयार करना जरूरी है।
इसके अलावा टास्क फोर्स में सरकार की तरफ से अतिरिक्त सदस्यों में कैबिनेट सेक्रेटरी, गृह सचिव, स्वास्थ्य सचिव, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनर्स के अध्यक्ष को शामिल किया गया है।
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अस्पतालों में नर्सों और महिला डॉक्टरों के लिए अलग से रेस्टरूम तक भी मौजूद नहीं हैं। वहीं नाइट शिफ्ट के दौरान वाहन की सुविधा भी नहीं दी जाती है। अस्पतालों के सीसीटीवी कैमरे भी ठीक से काम नहीं करते और अस्पताल में हथियारों को लेकर भी सतर्कता नहीं बरती जाती है। ऐसे में अस्पतालों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट एनटीएफ से ऐक्शन प्लान तैयार करने को कहा है जिससे कि जेंडर बैस्ड वॉइलेंस को रोका जा सके। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने ऐक्शन प्लान भी बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इमर्जेंसी रूम में अतिरिक्त सुरक्षा की सुविधा होनी चाहिए। अस्पताल में हथियारों को ले जाने से रोकने के लिए पर्याप्त स्क्रीनिंग होनी चाहिए। अगर कोई मरीज नहीं है तो अनावश्यक लोगों को अस्पताल में एंट्री ना दी जाए। इसके अलावा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा कर्मचारियों को तैयार किया जाए।
डॉक्टरों और नर्सों के लिए महिला और पुरुष के हिसाब से अलग-अलग रेस्ट रूम और कॉमन रूम की व्यवस्था की जाए। ऐसी जगहों पर बायोमेट्रिक और फिसियल रिकग्निशन की व्यवस्था की जाए। इन जगहों पर पर्याप्त लाइटिंग और सीसीटीवी की व्यवस्था हो। रात के 10 बजे से सुबह के 6 बजे तक वाहन की सुविधा दी जाए।