राइस मिलर्स
रायपुर, छत्तीसगढ़ में राइस मिलर्स पर एक सख्त कार्रवाई की जा रही है, क्योंकि चावल जमा करने में हो रही देरी के कारण हजारों मीट्रिक टन धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। खाद्य विभाग ने 121 मिलर्स को नोटिस जारी कर उन्हें निर्धारित समय में चावल जमा करने का अल्टीमेटम दिया है, जिससे मिलर्स में हड़कंप मच गया है। 30 अप्रैल तक चावल जमा करने की अंतिम तारीख है, और यदि मिलर्स समय पर चावल नहीं जमा करते हैं, तो उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
क्या है समस्या?
- धान का उठाव नहीं हो पाया: जिले के उपार्जन केंद्रों से अब तक 55 हजार मीट्रिक टन से अधिक चावल का उठाव नहीं हो पाया है।
- 7 हजार मीट्रिक टन धान अभी भी पड़ा: 7 हजार मीट्रिक टन धान अब भी खुले में पड़ा हुआ है, जिसे राइस मिलर्स द्वारा उठाया जाना बाकी है।
- मिलर्स की लापरवाही: 121 राइस मिलर्स में से 18 मिलर्स ने 1,000 से लेकर 2,600 मीट्रिक टन तक चावल जमा नहीं किया। इनमें से 5 मिलर्स के पास 2,000 मीट्रिक टन से ज्यादा चावल है।
मुख्य मिलर्स जिन पर कार्रवाई होगी:
खाद्य विभाग ने उन मिलर्स पर कड़ी नजर बनाई है जिन्होंने चावल जमा नहीं किया। नोटिस भेजे गए मिलर्स में प्रमुख नामों में शामिल हैं:
- एमएस इंडियन राइस
- अग्रोहा इंडस्ट्रीज
- कोनार्क इंडस्ट्रीज
- महालक्ष्मी पट्टी प्रोसेसिंग कंपनी
इन मिलर्स पर 30 अप्रैल तक चावल जमा करने की आखिरी चेतावनी दी गई है।
क्या होगा अगर चावल नहीं जमा हुआ?
यदि मिलर्स निर्धारित समय सीमा तक चावल जमा नहीं करते हैं, तो खाद्य विभाग कलेक्टर के निर्देश पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा। यह कदम किसानों और राज्य सरकार की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि समय पर चावल जमा करने से न केवल किसानों का हक मिलता है, बल्कि राज्य में चावल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित होती है।
सहकारी विपणन संघ का दबाव:
- 40 मिलर्स द्वारा धान का उठाव: 40 मिलर्स को अब बाकी बचे 7 हजार मीट्रिक टन धान का उठाव करना है, लेकिन इन मिलर्स पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
- विपणन संघ की भूमिका: सहकारी विपणन संघ मर्यादित ने मिलर्स पर लगातार दबाव डालते हुए चावल जमा करने के लिए उन्हें सचेत किया है।
समयसीमा खत्म होने वाली है!
अब सिर्फ 26 दिन ही बचे हैं, जब तक राइस मिलर्स को चावल जमा करने का कार्य पूरा नहीं करना है। 30 अप्रैल तक चावल जमा नहीं हुआ, तो मिलर्स को सख्त दंड का सामना करना पड़ सकता है। इस मुद्दे से संबंधित मिलर्स और राज्य के अधिकारियों के बीच सख्त बातचीत चल रही है।