“कर्तव्य पथ पर गूंजा छत्तीसगढ़ का जनजातीय शौर्य: डिजिटल संग्रहालय की झांकी ने देश का दिल जीत लिया”


छत्तीसगढ़ गणतंत्र दिवस झांकी


✍️ Article (400+ शब्द | Discover-Friendly | सरल भाषा)

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ, नई दिल्ली पर प्रस्तुत छत्तीसगढ़ की झांकी ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्” थीम पर आधारित यह झांकी जनजातीय समाज के अदम्य साहस, बलिदान और राष्ट्रभक्ति की गौरवगाथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती नजर आई। झांकी ने गणतंत्र दिवस परेड में छत्तीसगढ़ की विशिष्ट और गौरवपूर्ण पहचान को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित किया।

🇮🇳 राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने की सराहना

कर्तव्य पथ पर जब छत्तीसगढ़ की झांकी आगे बढ़ी, तो—

  • राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु
  • प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी
  • केंद्रीय मंत्रीगण और विशिष्ट अतिथि

सभी ने तालियों के साथ झांकी का स्वागत किया। दर्शक दीर्घा में मौजूद लाखों लोगों ने भी छत्तीसगढ़ की इस प्रस्तुति की भरपूर सराहना की।

💃 लोकनृत्य ने बढ़ाया आकर्षण

झांकी के साथ प्रस्तुत छत्तीसगढ़ के कलाकारों के पारंपरिक जनजातीय लोकनृत्य ने वातावरण को जीवंत बना दिया। ढोल, मांदर और पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने जनजातीय संस्कृति की आत्मा को कर्तव्य पथ पर उतार दिया।

🏛️ देश का पहला जनजातीय डिजिटल संग्रहालय

झांकी का मुख्य आकर्षण रहा—
नवा रायपुर अटल नगर में स्थापित देश का पहला जनजातीय डिजिटल संग्रहालय।

इस संग्रहालय में—

  • छत्तीसगढ़ सहित देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को
  • अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से
  • संरक्षित और प्रदर्शित किया गया है

इस ऐतिहासिक संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती के अवसर पर किया था।

🔥 वीर गुंडाधुर: भूमकाल विद्रोह का प्रतीक

झांकी के अग्र भाग में 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के महान नायक वीर गुंडाधुर को दर्शाया गया।

  • धुर्वा समाज के इस वीर योद्धा ने
  • अंग्रेजी शासन के अत्याचारों के खिलाफ
  • जनजातीय समाज को संगठित कर विद्रोह का नेतृत्व किया

विद्रोह के प्रतीक के रूप में—

  • आम की टहनियां
  • सूखी मिर्च

को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया, जो जनजातीय संघर्ष के गुप्त संकेत माने जाते थे। विद्रोह की तीव्रता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों को नागपुर से सेना बुलानी पड़ी, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ नहीं सके।

⚔️ वीर नारायण सिंह: छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद

झांकी के पृष्ठ भाग में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए दर्शाया गया।

  • उन्होंने अकाल के समय गरीबों के लिए अन्न भंडार खोले
  • अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष किया
  • 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई

🌿 जनजातीय गौरव की राष्ट्रीय पहचान

पूरी झांकी—

  • जनजातीय समाज के अदम्य साहस
  • बलिदान की भावना
  • और अटूट देशभक्ति

को सशक्त रूप में अभिव्यक्त करती रही। यह प्रस्तुति न केवल छत्तीसगढ़ के इतिहास को जीवंत करती है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि भारत की स्वतंत्रता की जड़ें जनजातीय संघर्षों में गहराई से जुड़ी हैं।

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