उत्तर प्रदेश का एक शहर है बहराइच. यहां भेड़िए के आतंक को पचास दिन से ज्यादा हो गए हैं. बहुत सारे गांव इसकी चपेट में हैं. अब तक दस लोगों की जान चली गई है, जिनमें नौ बच्चे शामिल हैं. ड्रोन फुटेज में 6 भेड़िए दिखे हैं, जिनमें से चार पकड़ लिए गए हैं और दो की तलाश जारी है. भेड़ियों को फंसाने के लिए पिंजरे लगाए जा रहे हैं. Doll को बच्चों की यूरीन में भिगोकर जगह-जगह रखा जा रहा है, जिससे भेड़िए उसकी गंध को देखते हुए करीब आएं और धर लिए जाएं. लोग और पुलिस-फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के लोग गश्त कर रहे हैं.
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में जिस चीज पर सबसे कम बातचीत हो रही है, वो है कि क्या लोगों को शिकार बना रहे जानवर भेड़िए ही हैं.
दरअसल, भेड़िए आम तौर पर झुंड में निकलते हैं और शिकार के लिए अत्यधिक रणनीतिक दृष्टिकोण प्रदर्शित करते हैं. अपने 42 तीखे दांतों का उपयोग करके, वे अपने शिकार को चीर देते हैं. ये जानवर रणनीतियों के साथ काम करते हैं, झुंड के हर सदस्य को भूमिकाएं सौंपकर शिकार करते वक्त अधिकतम दक्षता सुनिश्चित करते हैं.
माना जा रहा है कि बहराइच में आतंक के जिम्मेदार जानवर एक संकर प्रजाति हो सकती है, संभवतः एक भेड़िया और एक कुत्ते के बीच की जो अपने अद्वितीय आनुवांशिक मेकअप के कारण असामान्य व्यवहार प्रदर्शित कर रहा है.
भेड़िए के आतंक वाले इलाके की आबादी गरीब है, इससे समस्या और बढ़ गई है. स्थानीय लोगों की आजीविका के लिए जरूरी पशुधन, हिरण और खरगोश जैसे प्राकृतिक शिकार की कमी के कारण मानव आवास के करीब शिकारी जानवर आकर्षित हो रहे हैं. लोग अपने पशुओं को सुरक्षित रखते हैं लेकिन बच्चे बाहर सोते हैं, जिससे उन पर हमलों का खतरा बढ़ जाता है.
यह सवाल बना हुआ है कि क्या पकड़े गए सभी भेड़िए वास्तव में अपराधी हैं? क्योंकि उनकी संलिप्तता की पुष्टि करने के लिए कोई डीएनए टेस्ट नहीं किया गया है. लोगों की भावनाएं बंटी हुई हैं और चिंता बहुत ज्यादा है. कहीं ऐसा न हो कि खलनायक बना दिया गया भेड़िया इंसान के लिए वो दुश्मन बन जाए, जिसका अंधा-धुंध शिकार शुरू हो जाए. भारत में पहले से ही कम भेड़ियों की आबादी को खतरे में डालना एक समस्या को खत्म करने के लिए दूसरी समस्या पैदा कर देना होगी. इन जीवों के गैर-जरूरी उन्मूलन को रोकने के लिए वन्यजीवों के बारे में ज्यादा जागरूकता और समझ की जरूरत है, जिससे मानव और वन्यजीवों के सह-अस्तित्व को बढ़ावा दिया जा सके.