फिर हम पीछे क्यों, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया इन खतरों के प्रति आगाह

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के लोगों को शारीरिक गतिविधियों में कमी के खतरों के प्रति आगाह किया और उनसे फिटनेस के लिए योग और प्राणायाम का पूरा लाभ उठाने की अपील की. पूछा कि जब योग और प्राणायाम हमारी ही धरती से उपजे तो हम ही इसका पूरा लाभ उठाने में पीछे क्यों हैं?

मध्य प्रदेश के ​​इंदौर में श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन के दौरान कोविंद ने मेडिकल जर्नल ‘लैंसेट’ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में भारत में लोगों की शारीरिक फिटनेस में भारी गिरावट आई है. 

उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश की लगभग आधी आबादी अपनी दिनचर्या में पर्याप्त शारीरिक गतिविधियों को शामिल नहीं कर रही है और अनुमान है कि अगले 20 वर्षों में ऐसे लोगों की संख्या दोगुनी से भी अधिक हो जाएगी. 

कोविंद  ने कहा कि मुझे लगता है कि यह देश के भविष्य के लिए एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है क्योंकि किसी भी तरह के दीर्घकालिक लक्ष्य को प्राप्त करने में शारीरिक और मानसिक फिटनेस बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. 

कोविंद ने दीक्षांत समारोह में मंच पर मौजूद इंदौर के लोकसभा सांसद शंकर लालवानी से कहा कि यदि संभव हो तो वे सदन में देश के लोगों की फिटनेस के मुद्दे पर चर्चा का अनुरोध करें.

पूर्व राष्ट्रपति ने पूछा, “हमारा देश योग और प्राणायाम की जन्मभूमि है. आज दुनिया भर के लोग महर्षि पतंजलि द्वारा मानवता को दिए गए योग के उपहार का लाभ उठा रहे हैं. फिर हम अपनी सांस्कृतिक विरासत का पूरा लाभ उठाने में क्यों पीछे हैं?”

एक घटना को याद करते हुए कोविंद ने कहा, जब मैं राष्ट्रपति के रूप में क्यूबा की राजकीय यात्रा पर गया था, तो वहां उनके समकक्ष ने उनके सामने योग आसन करके उन्हें आश्चर्यचकित कर दिया था. इस घटना से पहले मेरे मन में यह बात थी कि कम्युनिस्ट देशों में योग और प्राणायाम की अवधारणा बहुत पीछे छूट गई है.

कोविंद ने छात्रों को नैतिकता, सत्यनिष्ठा और अच्छे चरित्र जैसे गुणों को अपनाने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि जब चरित्र में सुंदरता होती है, तो समाज में समरसता आती है. जब समाज में समरसता होती है, तो देश में व्यवस्था और समृद्धि आती है और जब देश में व्यवस्था और समृद्धि होती है, तो दुनिया में चारों ओर सुख और शांति होती है, जिसकी आज बहुत जरूरत है.पूरा विश्व महायुद्ध के मुहाने पर खड़ा है. 

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