हर साल यमुना में जो सफेद झाग का नजारा देखने को मिलता है, वैसा भारत में शायद ही किसी नदी में दिखता हो. देश में 8 प्रमुख और 400 से ज्यादा अन्य नदियां हैं. कुछ अरब सागर तो कुछ बंगाल की खाड़ी में मिलती है. अगर यमुना की बात करें तो उत्तराखंड के यमुनोत्री से लेकर प्रयाग के संगम तक ही इसका अस्तित्व दिखता है. लेकिन जैसे ही ये नदी दिल्ली के 22 किलोमीटर लंबे इलाके में आती है, इसका चेहरा ही खराब हो जाता है.
दिल्ली में घुसते ही यमुना नदी नहीं, बल्कि नाला बन जाती है. दुर्गंध, झाग, सूखे इलाके, शैवाल जैसी डरावनी चीजें आपके नाक, दिमाग और आंख को डराती हैं. नदी को देख कर जो अच्छा सुख और शांति मिलनी चाहिए, वो खत्म हो जाती है. क्यों दिल्ली में ही यमुना अपना अस्तित्व खो देती हैं? क्या सरकार की जिम्मेदारी है या जनता की?
1376 किलोमीटर लंबी इस नदी के पांच प्रमुख हिस्से हैं. जिसमें ही ये नदी शुरू होकर खत्म हो जाती है. इन्हीं चार सेक्शन में ये नदी एकदम साफ, गंदी, बहुत गंदी हो जाती है. इसका रंग भी बदला हुआ है. हरे रंग की नदी. आइए जानते हैं पहले इसके पांच भौगोलिक हिस्सों के बारे में…
उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और हिमालच प्रदेश के हिस्से. इसकी लंबाई करीब 172 किलोमीटर है. यहां यमुना की कमाल, गिरि, टोन्स और असन नाम की शाखाएं हैं. दो बराज पड़ते हैं. डाक पत्थर बराज और असन बराज. दो नहरे भी इन्हीं के नाम से हैं.
हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हिस्से. 224 किलोमीटर लंबा सेक्शन. यहां सोम, छोटी और यमुना ड्रेन नंबर 2 और 8 नदीं की मुख्य शाखाएं हैं. इसमें हथिनीकुंड बराज पड़ता है. जिसमें पश्चिमी और पूर्वी युमना कनाल जुड़ते हैं.
22 किलोमीटर लंबा ये इलाका 22 ड्रेन और हिंडन कट से जुड़ता है. इसमे दो बराज हैं- वजीराबाद और यमुना बराज. इसी से आगरा कनाल निकलती है. यही है नदी का सबसे प्रदूषित इलाका.
उत्तर प्रदेश और हरियाणा के हिस्से. 490 किलोमीटर लंबा सेक्शन. इसमें हिंडन, भुरिया नाला, मथुरा और वृंदावन के ड्रेन, आगरा के ड्रेन मिलते हैं. इसमें एक ही ओखला बराज है. आगरा और गुड़गांव कनाल है इसमें.
उत्तर प्रदेश में 468 किलोमीटर लंबा भौगोलिक इलाका. इसमें चंबल, केन, सिंध और बेतवा नदियां मिलती हैं.
हमने बचपन से ये कहानी सुनी है कि एक समय में यमुना में कालिया नाग रहता था. उसके जहर से यमुना उबलने लगती थी. जिससे नदी का पानी जहरीला हो जा रहा था. तब श्रीकृष्ण ने आकर उसे भगाया. जिस तरह सांप काटने पर इंसान अपने मुंह से झाग फेंकने लगता है. ठीक उसी तरह यमुना भी हर साल प्रदूषण के नाग की वजह से झाग फेंकने लगती है. प्रदूषण का ये नाग उसे डंसता है वजीराबाद से यमुना बराज ओखला के बीच. उत्तराखंड में यमुना साफ हैं. पांचवें हिस्से में भी साफ हैं. फिर दिल्ली के हिस्से में ही इतनी गंदगी क्यों?
यमुना देश की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक है.इसमें बिना ट्रीटमेंट के, आंशिक ट्रीटमेंट वाला सीवेज, औद्योगिक गंदगी, कृषि संबंधी वेस्ट इसे प्रदूषित करते हैं. दूसरी वजह प्राकृतिक है. गर्मियों में इस नदी में पानी लगभग सूख जाता है. पूरी नदी और उसके किनारे ढेरों पेड़-पौधे, कचरा, जानवरों के शव पड़े रहते हैं. बारिश के बाद जब ये बहते हैं, तो उनकी वजह से और प्रदूषण की वजह से भयानक स्तर का जहरीला झाग बनता है.