गुस्साए स्थानीय लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं. पुलिस की लापरवाही और राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद उनका गुस्सा और भी बढ़ गया है.
पीड़ित बच्ची के परिजनों ने अधिकारियों पर एफ़आईआर दर्ज करने में देरी का आरोप लगाया है. इसके कारण भी लोगों का गुस्सा बढ़ा है.
परिजनों के मुताबिक़, साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ हुए यौन उत्पीड़न को लेकर उसकी मां शिकायत करने पुलिस स्टेशन पहुंची. पुलिस ने तत्काल शिकायत दर्ज करने के बजाय उन्हें स्टेशन के बाहर 12 घंटे तक बैठाए रखा.
इस देरी की लोगों ने कड़ी निंदा की और पुलिस के काम करने के तरीके पर सवाल भी उठे.
अधिकारियों ने देरी के लिए ज़िम्मेदार पुलिसकर्मियों पर त्वरित कार्रवाई करने का वादा किया है. इसी बीच यह मामला राजनीतिक जंग के मैदान में तब्दील हो गया.
विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया. विपक्ष का दावा है कि स्कूल के निदेशक मंडल के एक सदस्य सत्ता पक्ष से जुड़े हुए हैं, जिसकी वजह से देरी की गई.
सत्ताधारी गठबंधन महायुति ने इन आरोपों को नकार दिया और इसे राजनीति से प्रेरित बताया.
इस घटना की खबर जैसे ही फैली, सैकड़ों चिंतित परिजन न्याय की मांग लेकर सड़कों पर उतर आए.
20 अगस्त को बदलापुर रेलवे स्टेशन में विरोध प्रदर्शन हुआ, जहां पत्थरबाज़ी की घटनाएं सामने आईं. पुलिस ने अब तक 1500 से अधिक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है, जबकि 60 लोगों को गिरफ़्तार किया है.
तनाव बढ़ने की वजह से सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए बदलापुर में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है.
बदलापुर मामले में बीबीसी मराठी ने पीड़ित बच्ची के परिवार से बात की. परिजनों ने इस घटना का भयावह क्रम बताया.
परिजनों के मुताबिक़, जब बच्ची ने अपने माता-पिता को इस घटना के बारे में बताया तो वे तुरंत पुलिस स्टेशन गए. हालांकि, उनकी परेशानी यहां खत्म नहीं हुई थी.
परिवार के एक सदस्य ने कहा, “पहले तो पुलिस ने शिकायत दर्ज करने में अहम समय बर्बाद किया. उन्होंने पीड़ित बच्ची, उसकी मां और उसके दादा को पुलिस स्टेशन के बाहर 12 घंटे तक इंतज़ार कराया.”
उन्होंने कहा, “हम सुबह 11:30 बजे पुलिस स्टेशन पहुंच गए थे और वहां देर रात तक थे. हम स्कूल भी गए, लेकिन वहां हमें किसी ने गंभीरता से नहीं लिया.”
इसी बीच महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री शंभूराज देसाई ने शिकायत दर्ज करने में देरी करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए. इसके साथ ही पीड़ित परिवार ने जिन पुलिस अधिकारियों पर देरी के आरोप लगाए थे, उन्हें निलंबित कर दिया गया.
पीड़ित परिवार ने बच्ची की मेडिकल जांच एक निजी अस्पताल में कराई, जहां डॉक्टर ने उत्पीड़न की विस्तृत रिपोर्ट दी. पुलिस पर आरोप है कि उसने इन सबूतों को नज़रअंदाज़ किया.
परिवार ने आरोप लगाया कि स्कूल बोर्ड के ट्रस्टी सत्तारूढ़ दल भाजपा से जुड़े हुए हैं, उन्होंने शिकायत दर्ज करने में देरी करने के लिए पुलिस पर दबाव बनाया.
परिवार ने कहा, “हमें भरोसा है कि स्कूल प्रशासन और पुलिस के बीच बातचीत हुई है और तुरंत शिकायत दर्ज करने से रोकने के लिए राजनीतिक दबाव बनाया गया.”
जनता के आक्रोश की वजह से पुलिस ने कार्रवाई की और पुलिस आयुक्त ने शिकायत दर्ज करने के लिए हस्तक्षेप किया.
परिवार को अब डर है कि कानूनी कार्यवाही में देरी की वजह से अभियुक्त को फ़ायदा मिल सकता है. प्रदर्शनकारी अभियुक्त को मौत की सज़ा देने की मांग कर रहे हैं. पीड़ित बच्ची के परिवार ने भी यही मांग की है.
परिवार ने कहा, “इस जघन्य अपराध के लिए अभियुक्त को फांसी की सज़ा मिलनी चाहिए. उम्रकैद की सज़ा पर्याप्त नहीं है, क्योंकि उसे अंततः रिहा किया जाएगा.”
उन्होंने कहा, “स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, मौत की सज़ा एकमात्र सही कदम होगा.”
इस घटना का सदमा पीड़ित परिवार पर भारी पड़ रहा है.
पीड़ित बच्ची के दर्द के बारे में बताते हुए परिवार के एक सदस्य ने कहा, “हमारी बच्ची अब कुछ हद तक शांत हो गई है, लेकिन अब वह बहुत ज़्यादा डरी हुई है और किसी के पास जाने से इनकार कर रही है.”
उन्होंने कहा, “शुरुआत में तो वह चलने में भी बहुत डरती थी.”
जिस स्कूल पर सवाल उठ रहे हैं वह बदलापुर का जाना-माना स्कूल है. यह स्कूल 62 साल पुराना है और यहां 5500 से ज्यादा छात्र पढ़ रहे हैं.
स्कूल के ट्रस्टी बोर्ड के सचिव तुषार आप्टे ने पुष्टि की है कि बोर्ड का एक सदस्य बीजेपी से जुड़ा हुआ है. हालांकि, उन्होंने पुलिस या स्कूल पर राजनीतिक दबाव डाले जाने के किसी भी दावे से इनकार किया.
आप्टे ने कहा, “राजनीतिक दबाव की बातें पूरी तरह झूठी हैं. इसके विपरीत हमने पुलिस जांच में पूरा सहयोग किया और माता-पिता को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया.”
आप्टे ने यह भी बताया कि अभियुक्त की पहचान कैसे की गई और उसे कैसे पकड़ा गया.
उन्होंने बताया, “पीड़ित बच्ची ने कुछ सुराग दिए, हालांकि वह बहुत छोटी है इसलिए ये ज्यादा स्पष्ट नहीं थे. बच्ची ने अभियुक्त को ‘दादा’ कहा और बताया कि वो ऊपर से आया था.”
“इस विवरण के आधार पर हमें संदेह था कि वह पहले या दूसरे फ्लोर पर सफाई करने वाला व्यक्ति हो सकता है. हमने उसी दिशा में जांच की और हम सुबह 4 बजे तक सब इंस्पेक्टर के साथ थे, जब आरोपी को आखिरकार ढूंढ लिया गया और गिरफ्तार कर लिया गया.”
बाल संरक्षण समिति की जांच में स्कूल में कई सुरक्षा खामियां सामने आईं. परिजनों ने आरोप लगाया कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं में लड़कियों के लिए महिला सहायकों की नियुक्ति नहीं की गई है.
इन आरोपों के जवाब में सचिव तुषार आप्टे ने घटना के दिन सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्डिंग नहीं होने की बात स्वीकार की.