माफियाओं पर सख्त एक्शन के लिए जानी जाती हैं ये IAS, सोनिया मीणा की कहानी

IAS अधिकारी सोनिया मीणा का नाम अक्सर चर्चाओं में बना रहता है. राजस्थान की रहने वाली सोनिया मीणा ने साल 2013 में यूपीएससी क्लियर किया था, उनकी ऑल इंडिया 36वीं रैंक आई थी. सोनिया ने अपने पहले प्रयास में ही यह उपलब्धि हासिल कर ली थी. ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह मध्य प्रदेश की अलग-अलग जिलों में तैनात रही हैं और वर्तमान में सोनिया नर्मदापुरम की जिला कलेक्टर हैं. 11 साल की सर्विस के दौरान सोनिया ने ना जाने कितने अपराधियों, गुडों और माफियाओं को ठिकाने लगाया है. सोनिया का नाम सुनते ही माफिया थर-थर कांपते हैं, इसलिए शायद उन्हें माफियाओं का काल कहा जाता है.

सोनिया मीणा की छवि एक कड़क अफसर की है. वो मूल रूप से राजस्थान सवाई माधोपुर की रहने वाली हैं. सोनिया मीणा के पिता टीका राम मीणा भी रिटायर्ड आईएएस अफसर हैं. वो केरल कैडर के IAS रह चुके हैं. सोनिया मीणा इससे पहले प्रबंध संचालक आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाएं, प्रबंध संचालक अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम व मप्र रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद के प्रबंध संचालक पद पर काम कर चुकी हैं. सोनिया 2017 में जब एसडीएम के पद पर तैनीत थीं तब उन्होंने खनन माफिया अर्जुन सिंह के खिलाफ कार्रवाई की थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सोनिया मीणा, जहां भी रही, वहां खनन और शराब माफिया के खिलाफ कार्यवाही जरूर होती थी. 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जज जीएस अहलूवालिया ने जमीन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान नर्मदापुरम कलेक्टर सोनिया मीणा को कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे लेकिन सोनिया मीणा कोर्ट में नहीं पहुंची उन्होंने अपनी जगह एडीएम डीके सिंह को भेज दिया था. इस दौरान जज ने कलेक्टर के लेटर दिखाने पर एडीएम पर अपना जमकर गुस्सा उतारा. उन्होंने इसके लिए मुख्य सचिव को कलेक्टर के अनुचित आचरण के लिए कार्रवाई करने को कहा है.

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