कितना शुद्ध है आपका भोजन? एक घंटे में बता देगी ये मशीन, मिलावटखोरी पर लगेगी लगाम

आपका भोजन कितना शुद्ध है। भोजन में कितनी मिलावट हुई है? ये सब पता करना अब आसान हो जाएगा। खान-पान की चीजों में में मिलावट की सटीक जांच आसानी से हो सकेगी। वह भी एक घंटे के भीतर। भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) तथा सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीईईआरआई) पिलानी ने फ्लोरीपीसीआर मशीन विकसित की है। यह चार मशीनों का कॉम्पैक्ट वर्जन है और एडवांस्ड डीएनए आधारित जांच के जरिए मीट उत्पादों की प्रामाणिकता तय करती है।

इस मशीन से मॉलीक्यूल, बैक्टीरिया की पहचान कर रोगों की डायग्नोसिस की जा सकती है। हालांकि यह मीट की प्रामाणिकता की जांच के लिए डिजाइन किया गया है लेकिन डीएनए युक्त किसी भी उत्पाद की जांच में सक्षम है। नियामक एजेंसियां इसे खाद्य धोखाधड़ी रोकने में कर सकती हैं। राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) और सीएसआईआर ने फ्लोरीपीसीआर की जांच को मान्यता दी है। आईआईटीआर ने तकनीक का पेटेंट हासिल कर लिया है।

हाल में मीट आधारित खाद्य उत्पादों में मिलावट की शिकायतों के बाद आईआईटीआर के वैज्ञानिकों ने तेजी से जांच करने वाली मशीन विकसित करने पर काम शुरू किया। प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. स्मृति प्रिया ने तकनीकी विकास पर काम शुरू किया। डॉ. स्मृति ने बताया कि अक्सर उच्च गुणवत्ता वाले मीट में मिलावट कर सस्ते में परिवर्तित कर दिया दाता है या बिना जानकारी के अन्य प्रजातियों के मीट मिला दिए जाते हैं। इसे देखते हुए इसे तैयार किया गया है।

डॉ. स्मृति कहती हैं कि तकनीक बहुत अधिक महंगी नहीं है। लागत 3 से 4 लाख रुपये आएगी। फ्लोरीपीसीआर डीएनए युक्त किसी भी उत्पाद की जांच कर सकती है। जैसे गेहूं, सोया, दालें, मांस आधारित उत्पादों की जांच कर सकती हैं। किसी भी उत्पाद में बैक्टीरिया, मॉलीक्यूल की उपलब्धता जैसे रोगकारक तत्वों की पहचान करने में सक्षम है। तकनीक सस्ती होने के नाते पैथोलॉजी, खाद्य उद्योग, नियामक एजेंसियों, विश्वविद्यालय लैबोटरी में इस्तेमाल आसान हो जाएगा।

मिलावट की जांच के लिए पीसीआर (पॉलीमरेज चेन रिएक्शन), आरटी-पीसीआर (रियल-टाइम पीसीआर), फ्लोरोसेंस डिटेक्शन और स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री को मिलाकर एक कॉम्पैक्ट फ्लोरीपीसीआर ऑल-इन-वन डिवाइस विकसित की गई। यह तेजी से विश्वनीय डीएनए एंप्लीफिकेशन के जरिए फ्लूओरेसेंस-आधारित पहचान करने में सक्षम है। जांच के पारंपरिक तरीकों की अपेक्षा फ्लोरीपीसीआर ने तेज और अधिक सटीक परिणाम दिए हैं। इसमें खाद्य सैंपल की एक घंटे में जांच संभव हो सकेगी। अभी जांच रिपोर्ट आने में वक्त लगता है।

आईआईटीआर निदेशक डॉ. भास्कर नारायण ने बताया, हमारे संस्थान ने मिलावट के जांच के लिए लैब स्केल फ्लोरीपीसीआर का प्रोटोटाइप तैयार किया है। यह जांच की सबसे तेज, सस्ती और प्रामाणिक मशीन है। तकनीक को एनएबीएल ने मान्यता दी है। पेटेंट कॉपीराइट आईआईटीआर के पास है। तकनीक ट्रांसफर के लिए उद्योगों की तलाश की जा रही है।

भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान और सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च इंस्टीट्यूट पिलानी ने विकसित की मशीन, डीएनए युक्त किसी भी उत्पाद की जांच में सक्षम

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