मीनापुर अन्य गांवों के लिए उदाहरण बन रहा है, कि कैसे एक गांव खेती में आत्मनिर्भरता के जरिए समृद्ध हो सकता है. गांव की पहचान फूलगोभी के बीज की खेती के लिए होती है.
आलम ये है कि फूल गोभी के बीज से गांव का एक साधारण किसान भी सालाना लाखों रुपए की आय अर्जित कर रहा है. मनोज कुमार 20 साल से गोभी बीज और बिचारा की खेती कर रहे हैं. इस गांव में लगभग किसान गोभी बीज की खेती करते हैं. जिसका परिणाम है कि यहां के किसान सरकारी नौकरी की जगह खेती को बेहतर मान रहे हैं.
इस गांव के आसपास रहने वाले किसान भी गोभी बीज और बिचारा का काम करते हैं और यहां के उत्पादित बीज देश के विभिन्न राज्यों में भेजा जाता है. इस गांव के खेतों से तैयार बीज की सबसे बड़ी खासियत है कि यहां की फूल गोभी के पौधे रोपण के 40 से 45 दिनों में फूल तैयार हो जाता है.
मनोज कुमार बताते हैं कि मीनापुर गांव की अबादी के 75% लोग गोभी बीज और बिचारा खेती करते हैं. हम भी एक-एक करके में गोभी तैयार करते हैं और 5 महीने के अंदर 7 से 8 लाख रुपए की कमाई करते है.
इस गांव की बीज सिर्फ बिहार ही नहीं दूसरे राज्य में भी बड़े पैमाने पर सप्लाई होती है. इस गांव के किसानों का मुख्य पैसा गोभी बन गया. यहां के लोग दूसरे जगह या दूसरे के यहां नौकरी नहीं करना चाहते हैं.