कभी भी टिकट कट सकता है… कृपालु महाराज की बेटी विशाखा का मौत से ठीक पहले का

मथुरा के प्रेम मंदिर और कुंडा के मनगढ़ धाम के संस्थापक जगद्गुरु कृपालु जी महाराज की तीनों बेटियां रविवार को दिल्ली जाते समय हादसे का शिकार हो गई थीं। इस दौरान सबसे बड़ी बेटी डॉक्टर विशाखा त्रिपाठी की मौत हो गई और अन्य दोनों बेटियों समेत पांच लोग घायल हो गए थे। असमय ही काल के गाल में समा जाने वाली विशाखा त्रिपाठी की मौत से ठीक पहले का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह कह रही हैं कि दिन बहुत कम रह गए हैं। कभी भी टिकट कट सकता है। विशाखा का यह वीडियो सामने आने के बाद लोगों में इस बात की चर्चा है कि उन्हें पहले ही अपनी मौत का एहसास हो गया था। उन्हें पता चल गया था कि किसी भी क्षण इस दुनिया को छोड़ना पड़ सकता है।

रविवार को कार से दिल्ली जाते समय यमुना एक्सप्रेस-वे पर ओवरटेक करते समय एक कैंटर अनियंत्रित होकर विशाखा की कार पर पलट गया था। इसी दौरान पीछे आ रही कार भी कैंटर से भिड़ गई थी। इससे उस कार में बैठी कृपालु महाराज की दो अन्य बेटियां श्यामा और कृष्णा त्रिपाठी समेत दो सेवादार और एक अन्य महिला सत्संगी की मौत हो गई थी।

कृपालु महाराज के निधन के बाद से तीनों बेटियां ही कुंडा, वृंदावन और मथुरा के आश्रमों को संभाल रही थीं। आश्रम में प्राय: सत्संग होता और विशाखा त्रिपाठी इसमे लोगों को प्रवचन देती थीं। हादसे वाले दिन दिल्ली जाने से ठीक पहले भी विशाखा ने सत्संग में भाग लिया था। इस दौरान वहां आई एक श्रद्धालु को विशाखा मोह माया त्यागने की सलाह देते हुए बता रही हैं कि हमें ईश्वर के पास ऊपर जाने की भी तैयारी उसी तरह से कर लेनी चाहिए जैसे मंदिर या अन्य जगहों पर जाने के लिए करते हैं। वह कहती हैं कि उनको (ईश्वर को) याद करो। वही मिलेंगे, उनसे ही हमारा काम है। वह यह भी कहती हैं कि दिन बहुत कम रह गए हैं। कभी भी टिकट कट सकता है। उन्हीं का स्मरण करो, सब कुछ छोड़ना ही है।

वह आगे कहती हैं कि एक क्षण का भरोसा नहीं है। यह नहीं होता, यह मत सोचो, बस यह सोचो कि हमें करना है। कहीं जाने से पहले जैसे तैयारी करते हैं। सामान, पैसा रखते हैं, यह रख लो वो रख लो करते हैं, वैसे ही वहां जाने की तैयारी कर लो।

अब केवल उनका नाम लो और उनका स्मरण कर लो। जो दान करना है अपने मन से कर लो। जो करना है कर लो। ऐसा मन बना लो कि वहां जाने के बाद क्या जवाब दोगे। अपना मन पूरी तरह बना लो। ऐसा न हो कि तुम्हें सबकुछ समझाया फिर भी वहां कुछ नहीं मिला तो क्या फायदा। तुम्हें वहां सबकुछ मिले इसकी तैयारी अभी से कर लो।

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