घुसपैठ वाले बयान से भड़की TMC, अमित शाह के खिलाफ पहुंची चुनाव आयोग; क्या रखी मांग

पश्चिम बंगाल में बीते दिनों गृहमंत्री अमित शाह द्वारा दिए बयानो से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) चिढ़ गई है। राज्य में होने वाले उपचुनावों के संदर्भ में टीएमसी ने केंद्रीय मंत्री पर चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाया है। टीएमसी के अध्यक्ष सुब्रत बक्शी ने राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी को एक पत्र भेजकर इस मुद्दे की जानकारी दी है। बक्शी के अनुसार, शाह ने पेत्रापोल कार्यक्रम में अपने आधिकारिक संबोधन के दौरान टीएमसी और पार्टी की अध्यक्ष ममता बनर्जी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की। वहीं भाजपा ने टीएमसी की शिकायत के खिलाफ पलटवार किया है।

बक्शी ने अपने पत्र में लिखा, “शाह ने 2026 में परिवर्तन पर जोर देते हुए जो भी कहा वह कार्यक्रम से कहीं भी जुड़ा हुआ नहीं था। इससे स्पष्ट होता है कि गृहमंत्री का इरादा आधिकारिक आयोजनों और चुनावी कार्यों के बीच की सीमा को बनाए रखने में नहीं है।” रविवार को एक केंद्रीय कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध प्रवासियों का घुसपैठ टीएमसी सरकार द्वारा प्रायोजित किया जा रहा है। शाह ने कहा, “जब सरकार द्वारा घुसपैठ का समर्थन किया जाता है, तो यह देशभर में शांति को बाधित करता है। बंगाल में घुसपैठ को खत्म करने का एकमात्र तरीका टीएमसी सरकार को 2026 में उखाड़ फेंकना है।”

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में 13 नवंबर को छह विधानसभा सीटों पर उपचुनावों की घोषणा की है। इसके परिणाम 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। आचार संहिता की घोषणा 15 अक्टूबर से प्रभावी हो गई थी। बक्शी के पत्र में कहा गया है, “यह स्पष्ट रूप से आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन है, जिसका उद्देश्य एक निष्पक्ष और अप्रतिभाशाली चुनावी प्रक्रिया सुनिश्चित करना है। ऐसे में आपसे अनुरोध है कि तुरंत शाह को इस घटना के लिए कारण बताओ नोटिस जारी करें।”

इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने कहा, “शाह ने अपने भाषण में केंद्रीय फंडों का विस्तार से ब्योरा दिया, जबकि टीएमसी द्वारा बार-बार लगाए गए आरोपों का खंडन किया। अब जब टीएमसी के पास कुछ नहीं बचा, तो वे चुनाव आयोग के पास शिकायतें लेकर जा रहे हैं।”

बंगाल में जिन छह सीटों पर मतदान होगा उनमें सिटाई, मदारिहाट, नाइहाटी, हारोआ, मेदिनीपुर और तालडंगरा शामिल हैं। सभी छह सीटों पर उप-चुनाव की आवश्यकता आन पड़ी है क्योंकि मौजूदा विधायक 2024 के लोकसभा चुनावों में प्रत्याशी बने और जीते।

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