वक्फ बिल पर बवाल, मीटिंग में TMC नेता कल्याण बनर्जी ने तोड़ी बोतल; खुद को ही कर लिया घायल

वक्फ बिल पर हुई संयुक्त संसदीय समिति की बैठक के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता और पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर से सांसद कल्याण बनर्जी और भाजपा नेता अभिजीत गंगोपाध्याय के बीच तीखी बहस के बाद बैठक में हंगामा मच गया। इस दौरान कल्याण बनर्जी ने गुस्से में एक कांच की पानी की बोतल तोड़ दी, जिससे उनकी खुद की उंगली घायल हो गई। घटना के बाद उन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया।

यह घटना तब हुई जब वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान कुछ विपक्षी सदस्यों ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और वकीलों की भूमिका पर सवाल उठाए। बैठक की अध्यक्षता भाजपा सांसद जगदंबिका पाल कर रहे थे। इस चर्चा के दौरान कल्याण बनर्जी और भाजपा नेता अभिजीत गंगोपाध्याय के बीच जमकर तकरार हुई, जिसके बाद स्थिति और बिगड़ गई।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, चश्मदीदों ने बताया कि बनर्जी ने गुस्से में पानी की कांच की बोतल उठाई और उसे जोर से मेज पर मार दिया, जिसके कारण उनके अंगूठे और तर्जनी उंगली पर चोट लगी। इस घटना के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता असदुद्दीन ओवैसी और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह ने उन्हें बैठक से बाहर निकालकर प्राथमिक चिकित्सा के लिए ले गए।

सोमवार को भी वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर आयोजित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक में तीखी बहस देखने को मिली। विपक्षी सदस्यों ने विधेयक पर परामर्श प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए, जबकि भाजपा सांसदों ने विधेयक का बचाव किया। विपक्ष के कुछ सदस्यों ने सरकार पर आरोप लगाया कि यह विधेयक राजनीतिक कारणों से लाया जा रहा है और मुस्लिम समुदाय को लक्षित करने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसके साथ ही विधेयक को लाने की ‘जल्दीबाजी’ पर भी सवाल खड़े किए गए।

उल्लेखनीय है कि इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाना है, जिसमें डिजिटलीकरण, सख्त ऑडिट, पारदर्शिता और अवैध रूप से कब्जा की गई संपत्तियों को पुनः प्राप्त करने के लिए कानूनी तंत्र को मजबूत करना शामिल है। वक्फ संयुक्त संसदीय समिति अब तक 15 बैठकें दिल्ली में कर चुकी है, जबकि अन्य 5 बैठकें देश के विभिन्न शहरों में आयोजित की गई हैं। इन बैठकों के माध्यम से सरकारी अधिकारियों, कानूनी विशेषज्ञों, वक्फ बोर्ड के सदस्यों और विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के समुदाय प्रतिनिधियों की राय ली जा रही है।

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