NSUI ने पुरजोर विरोध किया, NSUI जिला अध्यक्ष विशाल खंबारी एवं प्रदेश उपाध्यक्ष आदित्य सिंह बिसेन के नेतृत्व में सैकड़ों छात्र छात्राएं परीक्षा शुल्क बढ़ोतरी के विरोध में विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति व कुलसचिव के खिलाफ धरने पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी करने लगे,छात्रों का धरना प्रदर्शन लगातार 5 घंटों तक जारी रहा जिसके कारण कुलपति को कार्यपरिषद की बैठक स्थगित करनी पड़ी इसी बीच शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुशील मौर्य पूर्व विधायक रेखचंद जैन यु.का. जिलाध्यक्ष अजय बसाई छात्र छात्राओं के बीच पहुंचे और छात्र छात्राओं की मांगों को जायज़ बताकर उनकी आवाज़ बुलंद की।
प्रदेश उपाध्यक्ष आदित्य सिंह बिसेन व जिला अध्यक्ष विशाल खंबारी ने बताया कि कुलपति का दोहरा चरित्र है वो एक बाहरी एवं उच्च वर्गीय सोच के व्यक्ति है जो दिखावे और प्रचार के लिए “जनजातीय गौरव” की बात करते है उस नाम से कार्यक्रम आयोजित करते है और दूसरी तरफ वो बस्तर के जनतातीय छात्र छात्राओं एवं उनके परिजनों का आर्थिक शोषण करने में लगे हुए है, कुलपति का रवैया आदिवासियों के प्रति इतना क्षीण रहा है यह आप उनके कार्यक्रमों से पता लगा सकते है कि उनके ज्यादातर कार्यक्रमों आदिवासियों को मंच में स्थान तक नहीं मिला है, साथ ही परीक्षा शुल्क बढ़ोतरी की बात है तो कुलपति ने अवैधानिक तरीके से बिना विद्यपरिषद व कार्यपरिषद की बैठक बुलाए या किसी जनप्रतिनिधि से सलाह मशवरा किए शुल्क में वृद्धि कर दी और वो बस्तर के गरीब छात्र छात्राओं से उल जलूल निधि के नाम से शुल्क वसूल रहे है जैसे “कुलपति आकस्मिक सहायता निधि” – 15/- रुपए, शारीरिक शिक्षा शुल्क 50/- रुपए(आज तक किसी विद्यार्थी को ये सुविधा प्राप्त नहीं हुए इसकी जांच करवाई जा सकती है),स्थाई निधि शुल्क 15 रुपए,ग्रन्थालय विकास शुल्क 40/रुपए जबकि प्राइवेट के छात्र छात्राओं को ये सुविधा कभी मिलती ही नहीं है, छात्र कल्याण शुल्क 25/- रुपए (विश्वविद्यालय ने आज तक किसी विद्यार्थी के कल्याण में कोई योगदान नहीं रहा है)
ये सारे शुल्क प्रति विद्यार्थियों प्रति सेमेस्टर लिया जाता है परंतु छात्र छात्राओं को कोई सुविधा नहीं मिलती।
कुलपति बस्तर के किसानों,फुटकर व्यापारियों, मजदूरों के बच्चों की आर्थिक दुर्दशा को समझते ही नहीं है और उन्हें ये तक ज्ञात नहीं है कि इन बच्चों को अगर शासन छात्र वृत्ति ना दे तो आदिवासी बच्चे पढ़ने से वंचित रह जाएंगे।
साथ ही कुलपति के खर्चों की जांच करवाई जाए, जैसे अपनी छवि चमकाने के लिए जो कार्यक्रम करवाते है उनमें कितना खर्चा बैठता है, अगर ये खर्चे बंद कर दिए जाएं तो छात्र छात्राओं के फीस बढ़ाने की नौबत ही नहीं आएगी।