चंद्र ग्रहण 2026
चंद्र ग्रहण 2026: 3 घंटे 27 मिनट का अद्भुत नजारा, क्या है ‘ब्लड मून’ का रहस्य?
आज 3 मार्च 2026 को हो रहा चंद्र ग्रहण एक विशेष खगोलीय घटना है, जो न सिर्फ आस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि खगोलशास्त्रियों के लिए भी एक ऐतिहासिक संयोग प्रस्तुत कर रहा है। इस लेख में हम आपको चंद्र ग्रहण के बारे में सारी जानकारी देंगे, ताकि आप इस अद्भुत नजारे का पूरा लाभ उठा सकें।
चंद्र ग्रहण कब और कहां देखा जाएगा?
- समय: चंद्र ग्रहण 3:20 बजे दोपहर से शुरू होगा और 6:47 बजे शाम को समाप्त होगा। भारत के विभिन्न हिस्सों में ग्रहण का दृश्य अलग-अलग होगा।
- नई दिल्ली में विशेष नजारा: ग्रहण का दृश्य नई दिल्ली में 6:26 बजे शाम से लेकर 6:46 बजे तक देखा जा सकेगा। इस दौरान आपको ‘ब्लड मून’ का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा।
क्यों दिखेगा ‘ब्लड मून’?
चंद्र ग्रहण के दौरान जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती हैं और चंद्रमा का रंग लाल हो जाता है। यही कारण है कि इसे ‘ब्लड मून’ के नाम से जाना जाता है। यह दृश्य बहुत ही दुर्लभ और अद्भुत होता है, जो आस्था और खगोलशास्त्र दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है।
चंद्र ग्रहण का इतिहास और महत्व
- इस साल हो रहा चंद्र ग्रहण 122 साल बाद होली के दिन आ रहा है। इससे पहले 1904 में होली के दिन चंद्र ग्रहण देखने को मिला था।
- खगोलशास्त्र और ज्योतिष दोनों के हिसाब से यह चंद्र ग्रहण बहुत विशेष है। आचार्य दैवज्ञ अखिलेश्वरजी के अनुसार, ग्रहण के दौरान होने वाली खगोलीय गतिविधियों का आस्था पर भी गहरा असर पड़ता है।
चंद्र ग्रहण कहां देखा जा सकता है?
चंद्र ग्रहण का दृश्य दुनिया के कई देशों में दिखाई देगा। इसमें शामिल हैं:
- दक्षिण-पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, और पूर्वी एशिया में इसे पूरी तरह से देखा जा सकेगा।
- उत्तर अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों में भी चंद्र ग्रहण का दृश्य देखा जाएगा।
चंद्र ग्रहण कहां से नहीं दिखेगा?
चंद्र ग्रहण का दृश्य मध्य अफ्रीका और उसके आस-पास के क्षेत्रों में नहीं दिखाई देगा, क्योंकि इस समय चंद्रमा इन क्षेत्रों में क्षितिज के नीचे होगा।
चंद्र ग्रहण और उसकी ज्योतिषीय दृष्टि
ज्योतिष के अनुसार, चंद्र ग्रहण मानसिक स्थिति, भावनाओं और मन की शांति से जुड़ा होता है। इसे एक अवसर माना जाता है आत्मनिरीक्षण और मानसिक स्थिति को सुधारने का। वहीं, सूर्य का प्रभाव आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता पर होता है। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान और साधना का भी महत्व होता है।