विदेश भेजने के नाम पर फंसाया, जंगल में देते थे साइबर क्राइम की ट्रेनिंग, बचकर लौटे शिवेंद्र ने सुनाई दास्तां

विदेश में नौकरी के नाम पर युवाओं को फंसाया जाता था। इसके बाद म्यांमार ले जाकर उन्हें जंगलों में अपराधिक गतिविधियों में लिप्त होने की ट्रेनिंग दी जाती थी। अगर कोई विरोध करता था तो से प्रताड़ित करते थे। भागने पर करंट दिया जाता था और अगर किसी को बुखार आ जाए तो उस पर भी फाइन लगाते थे। चीनी कंपनी के चंगुल से लौटे कानपुर के युवक शिवेंद्र ने कई चौंकाने वाले दावे किए। उसने बताया कि थाईलैंड के बॉर्डर से सटे म्यांमार के एक इलाके में साइबर ठगी के लिए चाइनीज कंपनियों ने एक अलग दुनिया बसा रखी है। बॉर्डर के पास जंगलों में चाइनीज कंपनियों का खेल चल रहा है।

थाईलैंड के कॉल सेंटर में मोटी तनख्वाह का लालच देकर भारत के युवाओं को फंसाया जाता है। वहां अवैध तरीके से बॉर्डर पार करा कर इन युवाओं को म्यांमार के जंगलों में कंपनियों के कैंपस में भेजा जाता है। यहां डिजिटल अरेस्ट से लेकर फर्जी ओटीपी भेजना और आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी देना सिखाते हैं। वहां पंजाब, हरियाणा, यूपी, राजस्थान के सबसे ज्यादा लड़के भेजे जा रहे हैं। कैंपस में निजी आर्मी के जवान निगरानी करते हैं। भागने पर करंट लगाने से लेकर हाथ पैर तोड़ने तक की सजा दी जाती है। वहां पर इनकी एक जेल भी है। जहां कंपनी के नियमों का विरोध करने वाले युवकों को रखा जाता है।

तेज बोलने पर एक लाख का जुर्माना

शिवेंद्र ने बताया कि कंपनी के कैंपस में कैदियों जैसा बर्ताव होता है। कैंपस में ऊंची आवाज में बोलने पर एक लाख तक का जुर्माना लगता है। बुखार आने पर भी कंपनी 25 हजार का फाइन लगाती थी। यह रकम सैलरी से काट ली जाती है। कैंपस में कैमरे के बाहर मोबाइल का इस्तेमाल मना था। खाने के नाम पर कैंटीन में सिर्फ सीफूड और चावल मिलता है। शिवेंद्र ने म्यांमार में 22 दिन सिर्फ फिंगर फ्राई और ब्रेड में सॉस लगाकर खाया।

डब्ल्यू 56 थी शिवेंद्र की पहचान

शिवेंद्र ने बताया कि पूरी कंपनी में लोग कोड वर्ल्ड में बात करते थे। शिवेंद्र को डब्ल्यू 56 कोड वर्ड दिया गया था। कर्मचारी बातचीत में विभिन्न कोड और फर्जी नाम का प्रयोग करते थे।

पांच कारों को बदल थाईलैंड से म्यांमार पहुंचा

शिवेंद्र ने बताया कि 3 नवंबर को थाईलैंड पहुंचा तो वहां एक महिला सिपाही इंतजार कर रही थी। उसने उसका ऑन अराइवल वीजा क्लियर कराया। इसके बाद उसे होटल ले जाया गया। अगले दिन कार से 400 किलोमीटर का सफर तय कर शिवेंद्र थाईलैंड बॉर्डर पहुंचा। वहां एक एजेंट ने बोट के जरिए उसे म्यांमार के जंगलों में पहुंचाया। जहां तीसरी गाड़ी से शिवेंद्र कंपनी के कैंपस गेट पर पहुंचा। फिर चौथी गाड़ी अंदर ले गई। पांचवी कार शिवेंद्र को ऑफिस ले गई। पासपोर्ट कराया जमा डीबीएल कंपनी के कैंपस पहुंचते ही शिवेंद्र का पासपोर्ट और वीजा जमा कर लिया गया। फिर उसे एक आई कार्ड और खाने के लिए कैंटीन का कार्ड दिया गया। उसे कुछ दिन तक ट्रेनिंग दी गई। शिवेंद्र के विरोध पर उसे एक कमरे में रखा गया।

प्रभात ने कराई थी दलाल से मुलाकात

गूबा गार्डन के प्रभात ने दलाल संदीप शर्मा से शिवेंद्र की मुलाकात कराई थी। इसके बाद शिवेंद्र ने संदीप को सवा लाख रुपये दिए। म्यांमार में अजीत नाम के अधिकारी ने थाईलैंड में नौकरी करने की बात बताने को कहा था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *