धान खरीदी संकट
कोरबा के आदिवासी किसान का धान खरीदी संकट: जहर खाने तक पहुँची हद
कोरबा से दुखद खबर सामने आई है। जिले के हरदीबाजार क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पुटा के आदिवासी किसान सुमेर सिंह ने लगातार धान बेचने में आ रही परेशानियों से तंग आकर जहर का सेवन कर लिया।
किसान पिछले एक महीने से धान बेचने के लिए भटक रहे थे, लेकिन न तो उन्हें धान बेचने के लिए टोकन मिल रहा था, और न ही खरीदी प्रक्रिया में किसी प्रकार की स्पष्टता।
🔹 समस्या की जड़: प्रशासनिक लापरवाही
- किसान का आरोप है कि फड़ प्रभारी उन्हें बार-बार “आज-कल” कहकर टालते रहे।
- इससे मानसिक तनाव और निराशा बढ़ी।
- किसान ने कलेक्टर जनदर्शन में भी आवेदन दिया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं मिला।
इस लापरवाही ने किसान को आत्महत्या के कगार तक पहुँचा दिया।
🚨 तत्काल अस्पताल में भर्ती
- जहर सेवन के बाद परिजनों ने किसान को जिला अस्पताल कोरबा में भर्ती कराया।
- फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में इलाज चल रहा है।
- डॉक्टरों के अनुसार, किसान की स्थिति स्थिर लेकिन गंभीर बनी हुई है।
🏛️ राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
- घटना की जानकारी मिलने पर कांग्रेस सांसद ज्योत्सना महंत जिला अस्पताल पहुँची।
- उन्होंने किसान से मुलाकात की और परिजनों से चर्चा की।
- सांसद ने प्रशासन से किसानों के हितों की सुरक्षा और धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की।
📌 धान खरीदी संकट के मुख्य पहलू
- किसान टोकन न मिलने और धान न बिकने से परेशान।
- फड़ प्रभारी और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही।
- किसान की मानसिक स्थिति पर लगातार दबाव।
- प्रशासन की अनदेखी के चलते जनता में आक्रोश और हंगामा।
🧩 आगे क्या होना चाहिए
- प्रशासन को धान खरीदी प्रक्रिया में सुधार करना होगा।
- किसानों को सही समय पर टोकन और खरीदी सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
- ऐसे मामलों की तत्काल प्रतिक्रिया और मानसिक स्वास्थ्य सहायता सुनिश्चित की जाए।
- किसानों के प्रति जिम्मेदार और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था बनाना बेहद जरूरी है।