कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर के रेप और जघन्य हत्याकांड पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान शीर्ष अदालत ने बंगाल सरकार और अस्पताल प्रशासन पर तीखी टिप्पणी की। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने इस दौरान डॉक्टरों से अपील की कि वे धरना प्रदर्शन बंद करें और काम पर लौटें। अदालत ने कहा कि आपकी सुरक्षा तय करने के लिए हम हैं और आपको काम पर लौट जाना चाहिए। कोर्ट ने इस दौरान पीड़िता की तस्वीरें और नाम का पब्लिक में खुलासा होने पर हैरानी जताई और कहा कि हम इससे बहुत चिंतित हैं। आइए जानते हैं, सुप्रीम कोर्ट की 5 बड़ी बातें…
उच्चतम न्यायालय ने दुष्कर्म-हत्या मामले में एफआईर दर्ज करने में देरी को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई और पूछा कि अस्पताल के प्राधिकारी क्या कर रहे थे।
चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा कि जब आरजी कर मेडिकल कालेज एवं अस्पताल के प्राचार्य का आचरण जांच के घेरे में है तो उन्हें कैसे तुरंत किसी दूसरे कॉलेज में नियुक्त कर दिया गया। ऐसा लगता है कि अपराध का पता सुबह-सुबह ही चल गया था लेकिन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने इसे आत्महत्या बताने की कोशिश की।
कोर्ट ने कहा कि ज्यादातर युवा चिकित्सक 36 घंटे काम करते हैं, हमें काम करने की सुरक्षित स्थितियां सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय प्रोटोकॉल बनाने की जरूरत है। इसके साथ ही अदालत ने एक टास्ट फोर्स का गठन कर दिया है, जो महीने में फाइनल रिपोर्ट देगी। अब अदालत ने केस की अगली सुनवाई के लिए 22 अगस्त की तारीख तय की है।
बेंच ने सीबीआई को आदेश दिया है कि वह गुरुवार को उसे स्टेटस रिपोर्ट सौंपे। एजेंसी बताए कि अब तक इस मामले में उसकी जांच कहां पहुंची है और क्या मिला है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर महिलाएं काम पर नहीं जा पा रही हैं और काम करने की स्थितियां सुरक्षित नहीं हैं तो हम उन्हें समानता से वंचित कर रहे हैं।
अदालत का सबसे बड़ा सवाल था कि आखिर साढ़े तीन घंटे तक डॉक्टर का शव परिजनों को क्यों नहीं सौंपा गया। कैसे इस मामले में एफआईआर कराने में घंटों लग गए। वहीं इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भीड़ से हमला कराकर सबूत खत्म करने का आरोप लगाया। मेहता ने कहा कि सात हजार लोगों की भीड़ कोलकाता पुलिस की जानकारी के बिना आर जी कर अस्पताल में नहीं घुस सकती।
अदालत ने इस मामले को महिला सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि अगर महिलाएं काम पर नहीं जा पा रही हैं और काम करने की स्थितियां सुरक्षित नहीं हैं तो हम उन्हें समानता से वंचित कर रहे हैं।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह मीडिया में मृतका का नाम प्रकाशित होने से बहुत चिंतित हैं। कोर्ट ने कहा कि हमने स्वत: संज्ञान लिया है क्योंकि यह मामला देशभर में चिकित्सकों की सुरक्षा से जुड़े व्यवस्थागत मुद्दे को उठाता है।