नवरंगपुर ज़िले के उमरकोट ब्लॉक अंतर्गत बेहेड़ा पंचायत से सदर जाने वाली सड़क, जो नायक बाबू के घर से तुंबारलीगुड़ा तक जाती है, आज ग्रामीणों के लिए जीवन-मृत्यु का सवाल बन चुकी है।

हर दिन इसी रास्ते से स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे, गांव के बुजुर्ग, महिलाएँ और खेतों की ओर जाने वाले किसान आवाजाही करते हैं। मगर बरसात के दिनों में यही रास्ता कीचड़ और गड्ढों से भरकर एक “मरणजाल” का रूप ले लेता है।
सबसे अधिक परेशानी मासूम छात्र-छात्राओं को झेलनी पड़ रही है। स्कूल जाने का रास्ता अवरुद्ध होने से उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। शिक्षा, जो समाज और देश का भविष्य है, उस पर अंधेरा छा रहा है।

गांव के बीमार लोग, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाना लगभग असंभव हो गया है, क्योंकि इस मार्ग पर एम्बुलेंस भी नहीं पहुँच पाती। एक वृद्ध महिला ने व्यथा व्यक्त करते हुए कहा— “बीमार पड़ने पर गांववाले भगवान के भरोसे ही रहते हैं।”
जब यह मार्ग बंद हो जाता है, तो आसपास के ग्रामीणों को 8 से 10 किलोमीटर का चक्कर लगाकर जाना पड़ता है। इससे उनका समय, श्रम और धन तीनों का भारी नुकसान हो रहा है।
ग्रामीणों ने बार-बार कलेक्टर, बीडीओ, पीईओ और सरपंच तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। पूरे गांव में यही सवाल गूंज रहा है— “लोगों की पीड़ा कब सुनी जाएगी? मासूम बच्चे कब सुरक्षित होकर स्कूल जा पाएंगे?”
ग्रामीणों ने हमारे माध्यम से प्रशासन से निवेदन किया है कि इस मार्ग की तत्काल मरम्मत की जाए। उनका कहना है— “यह कोई सड़क नहीं, बल्कि मौत का जाल है। क्या प्रशासन की दयालु नजर इस रास्ते पर कभी पड़ेगी?”