चट्टानों के नीचे टनल नेटवर्क, हथियारों का अंडरग्राउंड भंडार…

लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर इजरायली सेना न सिर्फ हवाई बल्कि जमीनी हमला भी कर रही है. वैसे तो पिछले साल 7 अक्टूबर को जब हमास ने हमला किया था, तभी से इजरायली सेना उसके साथ-साथ हिज्बुल्लाह से भी लड़ ही रही थी. लेकिन इस साल 17 सितंबर को पेजर अटैक के बाद से इजरायली सेना ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है.

इजरायली सेना ने बेरूत में फिर जोरदार हमला किया है. इस हमले में हाशिम सफीद्दीन को मार गिराने का दावा है. हाशिम सफीद्दीन को हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह का वारिस माना जा रहा था. बताया जा रहा है कि जिस वक्त इजरायल ने बमबारी की, उस वक्त सफीद्दीन बंकर में सीक्रेट मीटिंग कर रहा था.

हालांकि, हिज्बुल्लाह भले ही इजरायल के हवाई हमलों का सामना न कर सके. लेकिन जमीन पर वो इजरायल को कड़ी टक्कर दे रहा है. दक्षिणी लेबनान में ग्राउंड ऑपरेशन में इजरायल के 8 सैनिक मारे जा चुके हैं. हालांकि, हिज्बुल्लाह 17 सैनिकों को मारने का दावा करता है. 

हिज्बुल्लाह को इजरायल और अमेरिका समेत कई मुल्क आतंकी संगठन मानते हैं. हिज्बुल्लाह दशकों से दक्षिणी लेबनान में एक्टिव है. हिज्बुल्लाह ने यहां सुरंग का नेटवर्क तैयार किया है. हथियार और मिसाइलों का भंडार कर रखा है. 

अल-जजीरा की रिपोर्ट बताती है कि दक्षिणी लेबनान को हिज्बुल्लाह के लड़ाके बहुत अच्छे से जानते हैं और इसी से इजरायली सेना के लिए जमीन पर लड़ पाना मुश्किल हो रहा है.

इजरायली सेना के ऑपरेशन में हिज्बुल्लाह के कई कमांडर और हजारों लड़ाके मारे गए हैं. लेकिन संगठन इतना ताकतवर है कि ये तुरंत ही इस खालीपन को भर देता है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि जहां भी जो लड़ाका या कमांडर मर रहा है, उसकी जगह पर तुरंत दूसरे कमांडर या लड़ाके को तैनात कर दिया जा रहा है.

लंदन के किंग्स कॉलेज में स्कूल ऑफ सिक्योरिटी स्टडीज के सीनियर लेक्चरार एंड्रियास क्रेग का मानना है कि इस जंग के मैदान में इजरायल को अपना अब तक का सबसे खतरनाक दुश्मन मिला है.

अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट बताती है कि हिज्बुल्लाह के पास 40 से 50 हजार लड़ाके हैं. हालांकि, नसरल्लाह ने 1 लाख से ज्यादा लड़ाके होने का दावा किया था.

गाजा में हमास ने जिस तरह से सुरंगों को नेटवर्क तैयार कर रखा था, उससे भी ज्यादा बड़ा नेटवर्क हिज्बुल्लाह ने लेबनान में तैयार किया है. इन सुरंगों का इस्तेमाल हिज्बुल्लाह के लड़ाके सिर्फ छिपने के लिए ही नहीं, बल्कि हथियार रखने और हमलों को अंजाम देने में भी करते हैं.

रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि पिछले हफ्ते इजरायल पर हिज्बुल्लाह ने जो रॉकेट हमला किया था, वो उन इलाकों से किया गया था, जिसे इजरायली सेना ने निशाना बनाने का दावा किया था.

ऐसा माना जाता है कि हिज्बुल्लाह के पास हथियारों का अंडरग्राउंड भंडार है. पिछले महीने कुछ तस्वीरें सामने आई थीं, जिसमें हिज्बुल्लाह के लड़ाके सुरंग में रॉकेट लॉन्चर के साथ ट्रक चलाते हुए दिख रहे थे.

इजरायल ने कुछ दिन पहले हिज्बुल्लाह की कई मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चरों पर हमला करने का दावा किया था. हालांकि, इजरायली थिंक टैंक अल्मा के रिसर्चर बोअज शपीरा ने रॉयटर्स को बताया है कि इजरायल ने अभी तक हिज्बुल्लाह की लंबी दूरी की मिसाइलों और ड्रोन साइटों को निशाना नहीं बनाया है.

अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट बताती है कि हिज्बुल्लाह के पास लगभग डेढ़ लाख रॉकेट हैं. एंड्रियास क्रेग का कहना है कि हिज्बुल्लाह की सबसे शक्तिशाली मिसाइलें जमीन के नीचे रखी हैं.

हिज्बुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में सुरंग नेटवर्क तैयार करने में सालों लगाए हैं. अनुमान है कि हिज्बुल्लाह ने सैकड़ों किलोमीटर का नेटवर्क तैयार कर रखा है.

2006 में इजरायल से चली 34 दिन की जंग के बाद हिज्बुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान के गांवों के नीचे सुरंगों का नेटवर्क बनाया है. माना जाता है कि ईरान और उत्तर कोरिया ने सुरंग बनाने में उसकी मदद की है. हिज्बुल्लाह के सुरंग नेटवर्क को तबाह करने के मकसद से इजरायल ने कुछ गांवों को भी निशाना बनाया है.

तेल अवीव स्थित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज से जुड़े रिसर्चर कार्मिट वालेंसी ने रॉयटर्स से कहा कि सुरंगों का नेटवर्क गाजा में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था और अब लेबनान में भी ये बहुत बड़ी चुनौती है.

इन सुरंगों की मदद से हिज्बुल्लाह के लड़ाके इजरायल पर हमला करते हैं और फिर इसमें छिप जाते हैं. जानकारों का मानना है कि लेबनान में हिज्बुल्लाह की सुरंगें इजरायली सेना के लिए बड़ा सिरदर्द बनेंगी. 

हमास की सुरंगें और हिज्बुल्लाह की सुरंगों में भी काफी अंतर है. गाजा में हमास ने जो सुरंगें बनाई थीं, उनके ऊपर मिट्टी थी. जबकि, हिज्बुल्लाह ने चट्टानों के नीचे अपने सुरंग के नेटवर्क को तैयार किया है. इसका मतलब हुआ कि बमबारी करके सुरंग के नेटवर्क को ध्वस्त करना भी इजरायल के लिए आसान नहीं होगा.

मौत से पहले हसन नसरल्लाह ने कहा था कि अगर इजरायल जंग शुरू करता है तो उसे उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. नसरल्लाह ने कहा था कि हिज्बुल्लाह के पास अब पहले से ज्यादा सटीक मिसाइलें हैं और अगर लेबनान पर युद्ध थोपा जाता है तो इजरायल को वो अंजाम भुगतना होगा, जिसकी उसने उम्मीद भी नहीं की होगी.

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