हल्दी भारतीय किचन का एक अहम हिस्सा है। इसके बिना कई सारे व्यंजनों का स्वाद बेस्वाद लगता है। सब्जी में रंगत लाना हो या फिर चोट लगने पर हल्दी वाला दूध पीना हो हल्दी हर घर की एक जरूरत है।
आयुर्वेद में हल्दी कोकैंसर के खतरे को कम करने के लिए असरदार माना गया है। हल्दी में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी ऑक्सीडेंट्स गुण पाए जाते हैं। आयुर्वेदिक डॉक्टर से जानिए हल्दी कैंसर में कितनी फायदेमंद है और इसका इस्तेमाल कैसे करना चाहिए?
कैंसर में हल्दी कितनी फायदेमंद?
कई शोधों में पाया गया है कि करक्यूमिन कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि को रोकने में सहायक हो सकता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। कुछ प्रयोगशाला अध्ययनों में यह भी देखा गया है कि करक्यूमिन कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को धीमा कर सकता है।
लेकिन यह समझना बहुत ज़रूरी है कि हल्दी कैंसर का इलाज नहीं है। इसे मुख्य उपचार (जैसे कीमोथेरेपी, रेडिएशन या सर्जरी) का विकल्प नहीं माना जाता, बल्कि सहायक (supportive) रूप में लिया जा सकता है और वह भी डॉक्टर की सलाह से।
आयुर्वेद में हल्दी को “हरिद्रा” कहा गया है और इसे रक्तशुद्धि, सूजन कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उपयोगी माना जाता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ अक्सर इसे संतुलित आहार और जीवनशैली के साथ लेने की सलाह देते हैं।
कैसे करें हल्दी का उपयोग
हल्दी वाला दूध – गुनगुने दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर।
काली मिर्च के साथ – करक्यूमिन का अवशोषण बढ़ाने के लिए हल्दी के साथ चुटकीभर काली मिर्च लेना फायदेमंद माना जाता है।
ताज़ी हल्दी या पाउडर – रोज़मर्रा की सब्जियों और दाल में संतुलित मात्रा में।
सप्लीमेंट के रूप में – केवल डॉक्टर की सलाह से, क्योंकि अधिक मात्रा नुकसान भी पहुंचा सकती है।
इन बातों का रखें खास ध्यान
- ज्यादा मात्रा में लेने से पेट में जलन या पाचन समस्या हो सकती है।
- जिन लोगों को पित्ताशय की समस्या है या जो ब्लड थिनर दवाइयाँ लेते हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
- कैंसर मरीज बिना डॉक्टर से पूछे कोई भी हर्बल सप्लीमेंट न लें।
हल्दी में औषधीय गुण जरूर हैं और यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है, लेकिन कैंसर का मुख्य इलाज नहीं है। इसे केवल सहायक रूप में और विशेषज्ञ की सलाह के साथ ही इस्तेमाल करना चाहिए।