दिव्यांग महिलाओं का सशक्तिकरण
दिव्यांग महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ब्रेल और ऑडियो बुक्स की पहल: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष
धमतरी, 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के अधिकारों और उनकी उपलब्धियों को सम्मान देने का अवसर है। इस बार, छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अनूठी पहल हुई है, जो दिव्यांग महिलाओं और बालिकाओं के लिए एक नई आशा लेकर आई है।
रायपुर स्थित लोक भवन में जनवरी 2026 में राज्यपाल रमेन डेका के करकमलों से ब्रेल पुस्तकों और ऑडियो बुक्स का विमोचन किया गया। इस पहल में ‘दिव्यांग महिलाओं की सफलता की कहानी’ और ‘छत्तीसगढ़ के वीर’ नामक दो महत्वपूर्ण ब्रेल पुस्तकें और 3000 से अधिक ऑडियो बुक्स का लोकार्पण किया गया। यह कदम विशेष रूप से उन दिव्यांग महिलाओं और बालिकाओं के लिए है जो शैक्षिक संसाधनों तक पहुँचने में कठिनाइयों का सामना करती हैं।
ब्रेल और ऑडियो बुक्स से दिव्यांग महिलाओं को सशक्त बनाना:
यह पहल दिव्यांग महिलाओं के लिए न केवल शिक्षा का एक नया रास्ता खोलती है, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक मजबूत कदम है। ब्रेल पुस्तकें और ऑडियो बुक्स अब दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं, जिससे वे अपनी पढ़ाई में बराबरी की स्थिति में आ रहे हैं। इस कदम से दिव्यांग महिलाओं को शिक्षा के साथ-साथ आत्मविश्वास और समाज में समान अधिकार मिलने का मौका मिल रहा है।
प्रीति शांडिल्य का योगदान:
इस पहल में धमतरी जिला की समर्पित शिक्षिका श्रीमती प्रीति शांडिल्य का विशेष योगदान रहा है। उन्हें दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारी कार्यों के लिए राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया। उनके प्रयासों से ही ब्रेल पुस्तकों और ऑडियो बुक्स के निर्माण का कार्य गति पकड़ पाया, जिससे दृष्टिबाधित बालिकाओं के लिए शिक्षा के नए द्वार खुले हैं।
प्रमुख पहल:
- ऑडियो बुक्स में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के सभी विषयों के पाठ, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सामग्री, और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
- इस सामग्री को “वर्ल्ड ऑडियो बुक” यूट्यूब चैनल पर निःशुल्क और सरल तरीके से उपलब्ध कराया गया है।
- इस पहल से दिव्यांग बच्चों के लिए एक समावेशी शिक्षा प्रणाली तैयार की गई है, जो उन्हें शिक्षा के अधिकारों से जोड़ने का काम करती है।
राज्यपाल की सराहना:
राज्यपाल रमेन डेका ने इस मानवीय प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि सामान्य पुस्तकों को ब्रेल और ऑडियो स्वरूप में उपलब्ध कराना समावेशी शिक्षा का आदर्श उदाहरण है। उन्होंने इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर फैलाने का प्रयास करने की बात भी कही।
प्रेरणा स्रोत के. शारदा और प्रीति शांडिल्य:
इस अभियान की प्रेरणा राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित के. शारदा और प्रीति शांडिल्य से मिली, जिन्होंने मिलकर 800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कीं। इसके बाद अन्य शिक्षकों के सहयोग से यह संख्या 3100 से अधिक हो गई। इन शिक्षिकाओं द्वारा तैयार की गई ब्रेल पुस्तकें 20 ब्रेल विद्यालयों में निःशुल्क वितरित की गईं।
कलेक्टर का बयान:
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि यह पहल न केवल शिक्षा को समावेशी बनाती है, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और सेवा भावना को भी मजबूत करती है। उन्होंने शिक्षकों के इस प्रयास को अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायी बताया।
महिला दिवस पर विशेष संदेश:
इस महिला दिवस पर यह पहल यह प्रमाणित करती है कि जब महिलाएं शिक्षा और सेवा के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों के लिए कार्य करती हैं, तो परिवर्तन की नई संभावनाएं जन्म लेती हैं। ब्रेल पुस्तकों और ऑडियो बुक्स के माध्यम से दिव्यांग महिलाओं और बालिकाओं के लिए ज्ञान के द्वार खुले हैं, जो उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनने की राह दिखा रहे हैं।
समाप्ति में, यह पहल एक मिसाल बनकर सामने आई है कि किस तरह महिला शिक्षा और सेवा के माध्यम से दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। यह कदम समाज में समावेशिता, समान अवसर और सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रहा है।