दशहरा बीतने के बावजूद श्रीराम लीला का मंचन जारी है। लखनऊ की सबसे पुरानी चौक की रामलीला के पांच दिन बीत चुके हैं। यह रामलीला सबसे अलग इसलिए है क्योंकि यहां श्रीराम और माता सीता का मुकुट, हनुमान जी की गदा से लेकर खड़ाऊं तक चांदी से निर्मित हैं।
इतना ही नहीं, तीर धनुष भी चांदी के ही प्रयोग में लाए जा रहे हैं। रामलीला मंचन के बाद इन सभी सामान कई तालों वाली तिजोरी में सुरक्षित रख दिया जाता है। यह रामलीला 87 वर्ष पुरानी है। नवाबों के शहर लखनऊ में चौक इलाके में इस रामलीला के मंचन का सिलसिला वर्ष 1957 से चल रहा है। रामलीला मंचन करने वाले किरदार जो गहने पहनते हैं वे भी करीब 90 साल पुराने हैं। इतना ही नहीं अहंकार के प्रतीक रावण के किरदार को जीवंत बनाने वाला आकर्षक भारी मुकुट भी चांदी का है।
इस रामलीला को चौक के व्यापारी आपसी सहयोग से जारी रखे हैं। सरकार से कोई मदद नहीं मिली। यहां तक कि चौक के राम मनोहर लोहिया पार्क में मंचन के लिए स्थान की भी मारामारी है। समिति के अनुसार वर्ष 2003 में समाजवादी पार्टी की सरकार ने पार्क में एक महीने के लिए स्थान आवंटित किया था। इसके बाद स्थिति फिर जस की तस हो गई।
चौक रामलीला समिति के महामंत्री राजकुमार वर्मा बताते हैं कि शुरुआत खुनखुन जी परिवार के योगदान से हुई थी। साथ ही लाला श्री नारायण अग्रवाल, मुकुट बिहारी अग्रवाल, गिरिराज किशोर अग्रवाल, प्रताप नारायण रस्तोगी, गोविंद प्रसाद वर्मा, काली चरण माहेश्वरी का विशेष योगदान रहा। कलाकारों की भूमिका में भी कई परिवार के सदस्य शामिल रहते हैं। राजकुमार वर्मा जहां 1973 में रावण और राजा दशरथ का किरदार निभा चुके हैं, वहीं, चौक सराफा कारोबारी विनोद महोश्वरी कभी मेघनाद, कभी सीता मैया तो कभी अक्षय कुमार के किरदार में नजर आते हैं।