प्याज पर बेमौसम बारिश की मार, महंगाई की बढ़ सकती है धार

नासिक: राज्य में मानसून से पहले हुई बेमौसम बारिश से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। बारिश के कारण फल-बागवानों के साथ-साथ प्याज उत्पादन करने वाले किसान भी हताश हैं। बाजार में उचित दाम न मिलने के कारण किसानों ने प्याज खेतों में ही संग्रहित कर रखा था, लेकिन अब हुई बेमौसम बारिश से प्याज सड़ गया है, जिससे उत्पादकों को बड़ा झटका लगा है। इसी कारण आने वाले दिनों में प्याज की आवक कम होने और दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

कोकण, नाशिक, पुणे, कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर, लातूर, अमरावती और नागपुर जैसे जिलों में 6 मई से लगातार बारिश हो रही है। ये जिले प्याज उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा धुले, अहिल्यनगर, सोलापुर, बीड, धाराशिव, अकोला, जालना, बुलढाणा और जळगांव के किसानों ने भी बारिश के कारण फसलों को नुकसान पहुंचने की सूचना दी है।

बेमौसम बारिश के कारण प्याज की फसल खराब

मार्च से पहले कटाई करने वाले किसानों को अच्छा उत्पादन मिला, लेकिन अप्रैल-मई तक इंतजार करने वालों की फसलों पर पहले अत्यधिक गर्मी और फिर बारिश का प्रभाव पड़ा। 20 मई तक लासलगांव बाजार में प्याज की औसत कीमत प्रति क्विंटल लगभग 1150 रुपये थी। लेकिन बेमौसम बारिश के कारण प्याज का बड़ा हिस्सा खराब हो गया है। इस वजह से बाजार में प्याज की सप्लाई कम होने की आशंका है, जिससे दामों में वृद्धि हो सकती है।

नुकसान की संभावना

महाराष्ट्र देश का प्रमुख प्याज निर्यातक राज्य है। नाशिक को देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक क्षेत्र माना जाता है। 2024-25 के दौरान लगभग 2 लाख 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्याज की खेती की गई है। प्याज के दाम बढ़ने पर सरकार निर्यात शुल्क, न्यूनतम निर्यात मूल्य और निर्यात प्रतिबंध लगाकर नियंत्रण करती है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।

इस वर्ष बुआई की लागत भी बढ़ी

इस साल मानसून मई में ही आ गया है, लेकिन मानसून समय पर आ रहा है, इसलिए खरीफ सीजन में बारिश के आसार अच्छे दिख रहे हैं। इसलिए एक तरफ जहां किसानों में उत्साह है, वहीं दूसरी तरफ रासायनिक खाद और बीज के दाम बढ़ गए हैं। एक बैग की कीमत 100 रुपये से 270 रुपये तक बढ़ने से किसानों की बुवाई की लागत बढ़ जाएगी। खाद के बढ़े दामों से किसानों में असंतोष फैल गया है।

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