2029 में यूपी बनेगा वन ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी : योगी

लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को भरोसा दिलाया कि 2029 में उत्तर प्रदेश वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनेगा और उत्तर प्रदेश देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था के रूप में अपने आप को स्थापित करेगा।
योगी ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले आठ सालों में मजबूती के साथ सफलता की ओर कदम बढ़ाए हैं। बिना रुके, बिना थके, बिना डिगे यह यात्रा अनवरत जारी रहेगी। आज उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा नेटवर्क है। सर्वाधिक मेट्रो का संचालन उत्तर प्रदेश कर रहा है। रेलवे का सबसे बड़ा नेटवर्क यूपी के पास है। देश की पहली रैपिड रेल यूपी में चल रही है और देश का पहला इनलैंड वॉटरवेज यूपी में है। भारत सरकार द्वारा संचालित 45 से अधिक स्कीम को उत्तर प्रदेश लीड करता है। यह नए भारत का नया उत्तर प्रदेश है और नया उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को जमीनी धरातल पर उतार कर अपने सामर्थ्य को देशवासियों के सामने रख रहा है।
उन्होने कहा कि उत्तर प्रदेश जो 2017 में सातवीं अर्थव्यवस्था था, आज देश की नंबर दो अर्थव्यवस्था बन चुका है। 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनामी बनने के लिए उत्तर प्रदेश ने जो कदम बढ़ाए हैं उसको आगे बढ़ाते हुए हम मानकर चलते हैं कि 2029 में उत्तर प्रदेश वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनेगा और उत्तर प्रदेश देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था के रूप में अपने आप को स्थापित करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत की आबादी का सबसे बड़ा राज्य है और देश का हृदय स्थल भी है। भारत की आत्मा उत्तर प्रदेश में निवास करती है, लेकिन जिन लोगों का एजेंडा विकास नहीं था, जिन लोगों ने उत्तर प्रदेश की इस आत्मा को पहचानने का कभी प्रयास नहीं किया वह लोग उत्तर प्रदेश के बारे में अपने एजेंडे को जबरन उत्तर प्रदेश पर थोपते थे। इसके चलते उत्तर प्रदेश जो व्यापक संभावनाओं वाला प्रदेश था वह 2014 के पहले पहचान के संकट से गुजर रहा था। नौजवान पहचान के लिए मोहताज हो गया, अन्नदाता किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हो गया, यहां का श्रमिक भुखमरी का शिकार हो गया, बेटी और व्यापारी दोनों की सुरक्षा में सेंध लग चुकी थी, पर्व और त्योहार दहशत के माहौल में मनाने को मजबूर होना पड़ता था। उत्तर प्रदेश की पहचान एक सामर्थ्यवान और असीम संभावनाओं वाले प्रदेश के रूप में नहीं बल्कि एक बीमारू राज्य के रूप में होने लगी।
उन्होने कहा कि 2017 से पहले सत्ता का संचालन करने वाले लोग चाहते ही नहीं थे कि उत्तर प्रदेश का कुछ हो। वह हर एक मामले में स्कीम को फेल करने में अपनी पूरी ताकत लगा देते थे। केंद्र में जो स्कीम बनती थी वह उत्तर प्रदेश में आकर फेल हो जाती थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में जब प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर उत्तर प्रदेश वासियों ने भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में मतदान किया और नई सरकार का गठन किया तब से प्रदेश की सफलता की यह यात्रा जारी है। हमारी सरकार उत्तर प्रदेश में 56 लाख गरीबों के लिए एक-एक आवास बना चुकी है। यह जो गरीब हैं उनमें दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और अन्य जातियों के लोग भी हैं। हम उनको जातीय खेमों में नहीं बांटते। हमारे लिए वह हमारा नागरिक है और उसकी खुशहाली हमारी खुशहाली है। इस भाव के साथ प्रधानमंत्री मोदी जी के सबका साथ सबका विकास के मंत्र को लेकर हमने काम किया।
इसके चलते लोगों के मन में विश्वास पैदा हुआ, जिसका परिणाम है कि हर सेक्टर में बदलाव देखने को मिल रहा है। हमने किसानों की कर्ज माफी के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया, हर गरीब को राशन कार्ड मिले यह भी व्यवस्था की, केंद्र और राज्य सरकार की स्कीम को समान रूप से प्रदेश के अंदर हर एक तबके तक पहुंचाने का भी काम किया, कानून व्यवस्था को बेहतर करने का भी काम किया और साथ-साथ उत्तर प्रदेश की पहचान से जुड़े मुद्दों को भी आगे बढ़ाने का काम किया। मुसहर, कोल, सहरिया, बुक्सा, थारू जैसे ट्राईबल को आजादी के बाद भी उनका हक नहीं मिला था। जमीन के पट्टे तक नहीं हुए थे, बहुत सारी जगह नागरिकता नहीं थी, आवास की कोई सुविधा नहीं थी, राशन कार्ड भी नहीं थे। आज सरकार ने इन्हें सभी प्रकार की योजनाओं से आच्छादित किया है।
योगी ने कहा कि पिछली सरकारों की उपेक्षा के कारण उत्तर प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर बंद सा हो गया था। हमने 2018 में उत्तर प्रदेश के परंपरागत उत्पादों को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के रूप में पहचान दी। आज पूरे देश के अंदर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट छाया हुआ है। यह स्वदेशी और स्वाभिमान का प्रतीक बन चुका है। 2017 के पहले चीन का जो प्रोडक्ट दिवाली और अन्य पर्व पर हमारे मार्केट में छा जाता था, लेकिन आज वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट को लोग गिफ्ट के रूप में देते हैं। हमारा हस्तशिल्प, हमारा कारीगर मुनाफा कमाता है। देश का पैसा देश में ही लगता है। नए रोजगार का सृजन भी होता है। 2020 में जब कोरोना महामारी आई तो उत्तर प्रदेश पहला राज्य था जिसने अपने 40 लाख से अधिक कारीगरों और कामगारों के लिए एमएसएमई यूनिट के द्वार खोले। आज हर तबके के व्यक्ति को उसके अनुरूप यहां काम भी मिला है और व्यापक रोजगार भी मिला है।

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