अमेरिका में नवंबर महीने में राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे हैं. राष्ट्रपति पद की दौड़ में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक कमला हैरिस आमने-सामने हैं. इस बीच खबर है कि भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स चुनाव में इतिहास रचने जा रही हैं.
सुनीता विलियम्स अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में अंतरिक्ष से वोट डालेंगी. वह धरती की सतह से लगभग 400 किलोमीटर की दूरी पर वोट डालकर इतिहास रचने जा रही हैं.
स्पेस में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए 1997 से वोटिंग की प्रक्रिया शुरू हुई थी. टेक्सास में एक बिल पारित कर नासा के अंतरिक्ष यात्रियों को भी स्पेस से वोट डालने का अधिकार दिया गया. इस कानून के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति अंतरिक्ष में है, तो वो इलेक्ट्रॉनिक रूप से वोट कर सकते हैं. ये कानून इसलिए बनाया गया क्योंकि नासा के अधिकतर अंतरिक्ष यात्री टेक्सास के ह्यूस्टन में रहते हैं. इस तरह विलियम्स दरअसल डेविड वॉल्फ की तरह ही अंतरिक्ष से वोट करेंगी.
विलियम्स को स्पेस से वोट डालने के लिए एक तय प्रक्रिया का पालन करना होगा. उन्हें सबसे पहले फेडरल पोस्टकार्ड एप्लिकेशन भरकर absentee बैलेट के लिए अनुरोध करना पड़ेगा. इसका मतलब है कि अंतरिक्ष यात्रियों को जिस चुनाव में भाग लेना हो, उसके लिए अप्लाई करना होता है. इसके बाद नासा के मिशन कंट्रोल सेंटर से एक सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक बैलट उन्हें भेजा जाता है. इसके बाद वह आईएसएस कंप्यूटर सिस्टम पर वोट डाल सकते हैं.
बता दें कि डेविड पहले अमेरिकी नागरिक थे, जिन्होंने स्पेश स्टेशन से राष्ट्रपति चुनाव में वोट दिया था. इसके बाद से, कई अन्य अंतरिक्ष यात्रियों ने भी इस प्रक्रिया को फॉलो किया है.
बता दें कि अमेरिका में चार नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं. इस बार मुकाबला रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक कमला हैरिस के बीच है. अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव नवंबर के पहले मंगलवार को होते हैं. इस दिन नागरिक अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के लिए वोट डालते हैं, जो कि इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्य होते हैं. इलेक्टोरल कॉलेज के लिए चुने गए प्रतिनिधि यानी इलेक्टर्स राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं. अमेरिका में कुल 538 इलेक्टर्स होते हैं, और किसी उम्मीदवार को राष्ट्रपति बनने के लिए कम से कम 270 वोट प्राप्त करने की आवश्यकता होती है. फिर अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव में जीते हुए उम्मीदवार के शपथ ग्रहण की बारी आती है. चुनाव नतीजों के बाद नए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति 20 जनवरी को शपथ लेते हैं.