यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (येडा) के भूखंड आवंटित करने के बहाने धोखाधड़ी करने का भंडाफोड़ करते हुए दिल्ली पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। ये लोग पहले से आवंटित भूखंड का फर्जी कागजात बनाकर उसे दोबारा बेच देते थे।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने हाल ही में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के भूखंड आवंटित करने के बहाने कई लोगों से लगभग 7-8 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने में शामिल दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान जगवीर सिंह और सतेंद्र के रूप में हुई है।
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने कहा कि मास्टरमाइंड सिंह ने अपनी महिला दोस्त वर्षा शर्मा के नाम पर ‘यमुना एक्सप्रेसवे डेवलपर्स’ नाम से एक फर्जी बैंक खाता संचालित किया था। गोयल ने कहा कि खाते से जुड़ा फोन नंबर और ईमेल पता उनके नाम पर पंजीकृत पाया गया। पुलिस के अनुसार, सिंह पीड़ितों को जमीन का लालच देकर अपने खाते में रकम मंगवाने के बाद एक छोटे से शुल्क के बदले में रकम दूसरों को भेज दिया।
पुलिस ने कहा कि सिंह ने अपने सहयोगी सतेंद्रर की मदद से गलत विवरण और हस्ताक्षर वाले फर्जी आवंटन पत्र तैयार किए। उसने पीड़ितों को धोखा देने के लिए इन जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। कई पीड़ितों की ओर से शिकायत मिलने के बाद क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। टीम ने पीड़ितों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों का विश्लेषण किया और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के साथ उनकी प्रामाणिकता की पुष्टि की। अधिकारियों ने पाया कि आवंटन पत्र जाली थे और उल्लिखित भूखंड पहले ही अन्य लोगों को आवंटित किए जा चुके थे।
तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के माध्यम से इंस्पेक्टर पवन कुमार के नेतृत्व में एक टीम ने उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के कोसी कलां में छापेमारी के बाद सिंह और सतेंद्र की पहचान की और उन्हें पकड़ लिया। टीम ने आरोपियों के पास से एक लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन, सिम कार्ड और कई फर्जी आवंटन पत्र जब्त किए हैं।