शासकीय भूमि कब्जा
ग्राम बिटकुली में शासकीय भूमि कब्जा को लेकर बवाल
छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले की सुहेला तहसील अंतर्गत ग्राम बिटकुली में शासकीय और चारागाह भूमि पर कथित कब्ज़े को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। गांव में माहौल इस कदर गर्म है कि लोगों ने साफ शब्दों में चेतावनी दे दी है—“गांव की जमीन पर मनमानी नहीं चलेगी।”
ग्रामीणों का आरोप है कि लीज समाप्त हो चुकी खदान क्षेत्र के पास धर्मशाला और मंदिर निर्माण के नाम पर बिना ग्रामसभा की अनुमति के भूमि समतलीकरण शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों को न तो पूर्व सूचना दी गई और न ही उनसे किसी प्रकार की सहमति ली गई।
क्या हैं ग्रामीणों के आरोप?
ग्रामीणों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
- शासकीय और चारागाह भूमि पर अवैध कब्ज़ा।
- नहर और टार रोड से लगे क्षेत्र में वर्षों से खदान अपशिष्ट की डंपिंग।
- हरे-भरे पेड़ों की कथित अवैध कटाई।
- बिना ग्रामसभा की अनुमति निर्माण कार्य की शुरुआत।
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं, बल्कि गांव के अधिकार और अस्तित्व का सवाल है।
पहले भी हुआ था विवाद
स्थानीय लोगों के अनुसार:
- कुछ समय पहले इसी स्थान पर अवैध कचरा डंपिंग की गई थी।
- ग्रामीणों के विरोध के बाद प्रशासन को वह डंपिंग हटानी पड़ी थी।
- इसके बावजूद उसी क्षेत्र में दोबारा निर्माण गतिविधि शुरू होना कई सवाल खड़े करता है।
ग्रामसभा में खुला विरोध
28 फरवरी 2026 को सरपंच की उपस्थिति में ग्रामसभा आयोजित की गई।
- पूरे गांव ने एकमत होकर निर्माण कार्य का विरोध किया।
- संबंधित पक्ष को भी बुलाया गया, जिन्होंने सीमांकन का हवाला दिया।
- ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि ग्रामसभा की अनुमति के बिना कोई भी कार्य स्वीकार नहीं होगा।
ग्रामसभा के बाद ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने तीन स्पष्ट मांगें रखी हैं:
- शासकीय व चारागाह भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य पर तत्काल रोक।
- कथित अवैध वृक्ष कटाई और डंपिंग की निष्पक्ष जांच।
- पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई।
क्यों अहम है यह मामला?
- चारागाह भूमि गांव की आजीविका से जुड़ी होती है।
- शासकीय भूमि सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित होती है।
- बिना ग्रामसभा अनुमति कार्य होना पंचायत अधिकारों पर सवाल खड़ा करता है।
ग्राम बिटकुली के लोगों ने साफ कर दिया है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेंगे।