छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों की एक दिवसीय हड़ताल, मांगे न माने जाने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर एक दिन की हड़ताल कर सरकार के सामने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस हड़ताल में राज्य के 33 जिलों और 148 ब्लॉक व तहसील मुख्यालयों के लाखों कर्मचारी शामिल हुए। रायपुर के कलेक्ट्रेट, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, और अन्य कई विभागों के कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा।

राजधानी में हड़ताल का असर: राजधानी रायपुर के इंडोर स्टेडियम परिसर में कर्मचारी एकत्रित हुए और सभा का आयोजन किया गया। सभा को छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा, प्रांतीय प्रवक्ता चंद्रशेखर तिवारी, बीपी शर्मा, पंकज पाण्डेय, सतीश मिश्रा, उमेश मुदलियार, और राकेश शर्मा ने संबोधित किया। कर्मचारियों ने नए रायपुर स्थित इंद्रावती भवन में प्रदर्शन किया, जिसका नेतृत्व कमल वर्मा ने किया। इस प्रदर्शन में संचनालय के अध्यक्ष जय साहू, संतोष वर्मा, सतीश शर्मा, और अन्य कर्मचारी भी शामिल थे।

हड़ताल की मुख्य मांगें: कर्मचारियों की मांगें भाजपा के घोषणा पत्र के आधार पर बनाई गई थीं, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. केंद्र के समान महंगाई भत्ता दिया जाए।
  2. जुलाई 2019 से लंबित महंगाई भत्तों के एरियर का भुगतान हो।
  3. चार स्तरीय वेतनमान लागू किया जाए।
  4. केंद्र के समान गृह भाड़ा भत्ता दिया जाए।
  5. अर्जित अवकाश का नगदीकरण 240 दिनों के स्थान पर 300 दिनों के लिए किया जाए।

आने वाले समय में अनिश्चितकालीन हड़ताल की संभावना: फेडरेशन के प्रवक्ता चंद्रशेखर तिवारी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार कर्मचारियों की मांगों को जल्द ही नहीं मानती, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होंगे। इसके समर्थन में प्रदेश भर के कर्मचारी एकजुट हो रहे हैं और आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।

सभा में उपस्थित प्रमुख कर्मचारी नेता: इस हड़ताल और सभा में प्रमुख रूप से कमल वर्मा, पंकज पाण्डेय, रीतू परिहार, आर.के. रिछारिया, राकेश शर्मा, सत्येंद्र देवांगन, और अन्य कर्मचारियों ने भाग लिया।

हड़ताल का प्रभाव: इस हड़ताल से राज्य के सरकारी कार्यालयों में कामकाज ठप रहा। स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और अन्य विभागों में सेवाएं प्रभावित रहीं, जिससे जनता को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

यह हड़ताल कर्मचारियों के संगठन की एकता और सरकार के सामने उनके मजबूत इरादों का प्रदर्शन थी। अब यह देखना होगा कि सरकार उनकी मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या स्थिति अनिश्चितकालीन हड़ताल तक पहुंचती है।

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