WhatsApp पर बढ़ी विवादों की लहर: एन्क्रिप्शन को लेकर मस्क और टेलीग्राम CEO ने उठाए सवाल

WhatsApp एन्क्रिप्शन


WhatsApp पर उठे सवाल: क्या वाकई एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन है सुरक्षित?

WhatsApp एक बार फिर से अपने एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और यूजर प्राइवेसी को लेकर विवादों के केंद्र में है। हाल ही में, एक ‘क्लास-एक्शन’ मुकदमे में आरोप लगाया गया कि WhatsApp का एन्क्रिप्शन सिर्फ दिखावा है और यह गुपचुप तरीके से यूजर चैट्स तक पहुंचने की अनुमति देता है। इस मुद्दे को लेकर दुनिया भर में चर्चा हो रही है, और इस बार सोशल मीडिया के दिग्गज Elon Musk और Telegram के CEO Pavel Durov ने भी WhatsApp पर सीधा हमला किया है।

मस्क ने WhatsApp को बताया असुरक्षित

Elon Musk, जो पहले भी Meta और उसके संस्थापक Mark Zuckerberg की आलोचना करते आए हैं, इस बार भी चुप नहीं रहे। उन्होंने ट्विटर (अब X) पर एक पोस्ट में लिखा, “WhatsApp पर भरोसा नहीं किया जा सकता।” इस पोस्ट में मस्क ने WhatsApp को यूजर्स के लिए ‘असुरक्षित’ बताया और यहां तक कि अपने प्लेटफॉर्म, X पर सुरक्षित कॉल्स की अपील की। मस्क का यह बयान एक बार फिर से सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स के बीच प्रतिस्पर्धा को हवा दे रहा है, खासकर जब वे गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं।

टेलीग्राम CEO की तीखी आलोचना

Telegram के CEO Pavel Durov ने भी WhatsApp पर कड़ा हमला किया। उन्होंने कहा कि WhatsApp का एन्क्रिप्शन यूजर्स को गुमराह कर सकता है, और कंपनी इसे धोखा देने के रूप में इस्तेमाल कर रही है। Durov ने अपने बयान में कहा, “WhatsApp का एन्क्रिप्शन इतिहास का सबसे बड़ा उपभोक्ता फ्रॉड हो सकता है।” उन्होंने दावा किया कि WhatsApp की तकनीक यूजर डेटा को तीसरे पक्षों के साथ शेयर करती है, जबकि Telegram ने कभी ऐसा नहीं किया। हालांकि, Durov के अपने प्लेटफॉर्म के एन्क्रिप्शन मॉडल में भी कुछ खामियां हैं, क्योंकि Telegram डिफॉल्ट रूप से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल नहीं करता, बल्कि केवल ‘Secret Chats’ में ही यह सुविधा मिलती है।

WhatsApp पर मुकदमा और आरोप

क्लास-एक्शन मुकदमे के तहत यह आरोप लगाया गया है कि WhatsApp ने अपने कर्मचारियों, कॉन्ट्रैक्टरों, और तीसरे पक्षों को यूजर चैट्स तक पहुंचने की अनुमति दी। इसमें Accenture जैसे बाहरी पार्टनर्स का नाम भी लिया गया है, जो कथित रूप से ‘क्लेप्टोग्राफिक बैकडोर’ के जरिए एन्क्रिप्शन को बायपास कर सकते हैं। इसके अलावा, आरोप लगाया गया कि जब यूजर्स किसी चैट को रिपोर्ट करते हैं या हानिकारक कंटेंट फ्लैग करते हैं, तो कुछ मैसेज की समीक्षा की जा सकती है, जिससे निजी डेटा की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।

WhatsApp का स्पष्टीकरण

इन सभी आरोपों के बाद, WhatsApp ने अपनी सफाई में कहा है कि उसके सिस्टम में कोई ‘बैकडोर’ नहीं है। कंपनी ने कहा कि वह पिछले एक दशक से Signal प्रोटोकॉल का उपयोग करके एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन प्रदान कर रही है, और इस प्रक्रिया में किसी भी तीसरे पक्ष को संदेशों तक पहुंचने की अनुमति नहीं है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई हानिकारक कंटेंट फ्लैग किया जाता है, तो केवल कुछ संदेशों की समीक्षा की जाती है, लेकिन यह इसका मतलब नहीं है कि WhatsApp के पास पूरी बातचीत तक पहुंच है।

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