विश्व गौरैया दिवस पर वेबीनार आयोजित: गौरैया संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

गौरैया संरक्षण


विश्व गौरैया दिवस: गहरी चिंता और जागरूकता की आवश्यकता

20 मार्च 2026 को विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड और राज्य वेटलैंड प्राधिकरण द्वारा एक वेबीनार का आयोजन किया गया। इस वेबीनार का मुख्य उद्देश्य गौरैया की घटती संख्या के बारे में जागरूकता फैलाना और उनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों, पक्षी प्रेमियों, महाविद्यालयों के प्राध्यापकों और छात्रों ने भाग लिया, जो इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए।

गौरैया की घटती संख्या पर गहरी चिंता

कार्यक्रम के संयोजक श्री मातेश्वरन व्ही., सदस्य सचिव, छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड और राज्य वेटलैंड प्राधिकरण ने गौरैया की घटती संख्या को लेकर चिंता जताई। उन्होंने इस दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। श्री व्ही. ने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे इस समस्या को गंभीरता से लें और गौरैया संरक्षण के लिए सक्रिय कदम उठाएं।

विषय विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

वेबीनार में विभिन्न विशेषज्ञों ने गौरैया के संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की:

  1. डॉ. हितनारायण टंडन, सहायक प्राध्यापक, संत गुरु घासीदास शासकीय पीजी महाविद्यालय, कुरूद ने गौरैया की घटती संख्या के कारणों और सुरक्षा उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने शहरीकरण, प्रदूषण और प्राकृतिक आवासों की कमी को गौरैया के अस्तित्व के लिए खतरनाक बताया। इसके साथ ही, उन्होंने सुरक्षा उपायों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।
  2. श्री जागेश्वर वर्मा, ई-बर्ड (छत्तीसगढ़) के रिव्यूअर ने गौरैया के लिए अनुकूल आवास विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने शहरीकरण के प्रभावों को कम करने और पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने के उपायों की चर्चा की। उनका कहना था कि यदि हम अपने पर्यावरण को पक्षियों के अनुकूल बनाएं, तो गौरैया का संरक्षण संभव है।

गौरैया संरक्षण की आवश्यकता और उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस हर साल 20 मार्च को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य शहरीकरण और प्रदूषण के कारण तेजी से विलुप्त हो रही गौरैया (Passer domesticus) के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। गौरैया न केवल हमारे पर्यावरण का हिस्सा हैं, बल्कि ये जैव विविधता के महत्वपूर्ण घटक भी हैं।

वेबीनार का उद्देश्य गौरैया संरक्षण के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना और सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों को और प्रभावी बनाना था। गौरैया की घटती आबादी के कारण, यह जरूरी है कि हम उनके लिए सुरक्षित वातावरण और दाने-पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

विशेषज्ञों द्वारा पूछे गए सवालों का समाधान

वेबीनार के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न सवाल पूछे, जिनका समाधान विशेषज्ञों ने दिया। यह चर्चा इस दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हुई, जिससे लोगों में गौरैया के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ी।

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