राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और कांग्रेस सांसद जयराम रमेश के बीच एक दिलचस्प बातचीत देखने को मिली। गुरुवार को जब जयराम रमेश ने पूछा, “हम सभापति को कैसे मना सकते हैं?” इस सवाल पर उपराष्ट्रपति कई अहम बात राज्यसभा में कही। उन्होंने सांसदों को संबोधित करते हुए सदन के नियमों का पालन करने की सख्त जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सदन में किसी भी प्रकार का उल्लंघन लोकतंत्र के इस पवित्र मंदिर का अपमान होगा। धनखड़ ने स्पष्ट किया कि अगर कोई सदस्य ‘मेरी बात या कोई बात नहीं’ जैसी सोच रखता है, तो यह न केवल अलोकतांत्रिक है बल्कि सदन की गरिमा और अस्तित्व के लिए चुनौती भी है।
सभापति को मनाने की बात पर क्या बोले जगदीप धनखड़
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश के एक सवाल का जवाब देते हुए धनखड़ ने कहा कि सदन के सभापति को मनाने का एकमात्र तरीका नियमों का पालन करना है। उन्होंने कहा, “जयराम रमेश ने एक महत्वपूर्ण सवाल किया कि चेयर (पीठासीन) को कैसे मनाया जाए। इसका जवाब है- नियमों का पालन करके। सभापति के फैसलों का सम्मान होना चाहिए, उन्हें चुनौती देना सही तरीका नहीं है।”
धनखड़ ने सदन के नियमों को व्यापक और संतुलित बताया, जो हर सदस्य को अपनी बात रखने का मौका देते हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सत्र के दौरान समय आवंटित किया गया था, लेकिन वक्ताओं की कमी के कारण उस समय का उपयोग नहीं हो सका। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे नियमों के तहत अपनी चिंताओं को सदन में रखें।
वहीं बुधवार को धनखड़ ने भारतीय संविधान के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए सदस्यों से सदन की उत्पादकता बढ़ाने और चर्चा, संवाद और नियमों के पालन का माहौल बनाने की अपील की। उन्होंने कहा, “यह दिन ऐतिहासिक है, क्योंकि यह भारतीय संविधान को अपनाए जाने के चौथे चतुर्थांश का पहला दिन है। आइए, हम चर्चा, संवाद और नियमों के पालन से एक आदर्श स्थापित करें।” धनखड़ ने अपने संबोधन में लोकतंत्र के मंदिर के रूप में संसद की गरिमा का महत्व दोहराया। उन्होंने कहा कि सदन के नियमों से भटकना इस पवित्र मंच का अपमान है। उन्होंने सांसदों से नियमों का पालन करने और सदन की गरिमा बनाए रखने का आग्रह किया।