चंद्रयान-4 के लिए क्या है सबसे बड़ी चुनौती, चांद से कैसे आएगी मिट्टी; ISRO चीफ ने सोमनाथ ने बताया

अंतरिक्ष में भारत की नई उड़ान का सपना साकार करने के लिए पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल के 100 दिन के भीतर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के कई प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इन प्रोजेक्ट्स में चंद्रयान-4, शुक्र ग्रह मिशन, सूर्य रॉकेट और मिशन गगनयान जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। इन परियोजनाओं की कुल लागत 31,772 करोड़ रुपये है। इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलने के बाद इसरो चीफ डॉ. एस सोमनाथ गदगद हैं। इन प्रोजेक्ट्स में सबसे खास मिशन चंद्रयान-4 माना जा रहा है। इसरो चीफ ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इस मिशन की चुनौतियों के बारे में बताया।

इसरो के कई मिशन को मंजूरी मिलने के बाद इसरो चीफ डॉक्टर एस सोमनाथ ने एनडीटीवी से खास इंटरव्यू में खुशी जताई है। उन्होंने कहा, “भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष दृष्टिकोण को अब पंख मिल गए हैं। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

पीएम मोदी के कैबिनेट द्वारा जिन परियोजनाओं को मंजूरी मिली मंजूरी है इनमें सबसे प्रमुख ‘चंद्रयान-4’ मिशन है, जिसे 2,104 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के शिव-शक्ति क्षेत्र से नमूने इकट्ठा करना है। यह मिशन भारत के 2040 तक चंद्रमा पर मानव भेजने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। डॉक्टर सोमनाथ ने बताया, “चंद्रयान-3 ने यह साबित कर दिया कि हम चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग कर सकते हैं। अब हमारा अगला लक्ष्य सुरक्षित वापसी करना है। इसके लिए नई तकनीकों का विकास जरूरी है, जो चंद्रयान-4 का हिस्सा हैं।”

इस मिशन के तहत चंद्रमा से नमूने लाना काफी चुनौतीपूर्ण होगा। डॉक्टर सोमनाथ ने बताया, “चंद्रमा से नमूने इकट्ठा करना आसान नहीं है। हमें अलग-अलग स्थानों से खुदाई कर नमूने लेने होंगे, फिर उन्हें एक कंटेनर में सुरक्षित रखना होगा। इसके बाद उस कंटेनर को एक लैंडर तक पहुंचाना होगा, जो चंद्रमा से उड़ान भरेगा। यह सारी प्रक्रिया रोबोटिक होगी, जो कई बार जटिल साबित हो सकती है।”

चंद्रयान-4 के अलावा इसरो को शुक्र ग्रह के रिसर्च के लिए भी मंजूरी मिली है, जो भारत की ग्रह विज्ञान में बढ़ती रुचि का प्रतीक है। इसके साथ ही ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ की स्थापना और एक नए मेगा रॉकेट ‘सूर्य’ का विकास भी इसरो के भविष्य के लक्ष्यों में शामिल हैं। इन परियोजनाओं के जरिए भारत अंतरिक्ष में अपनी मानव उड़ान क्षमता को मजबूत कर रहा है और गहरे अंतरिक्ष की खोज की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

डॉक्टर सोमनाथ ने यह भी सुनिश्चित किया कि ISRO के अंतरिक्ष मिशन केवल खोज और रिसर्च तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ये तकनीक आम लोगों के जीवन को भी बेहतर बनाएगी। उन्होंने कहा, “हम अंतरिक्ष में भले ही दूर तक जाएं, पर किसान और मछुआरे को नहीं भूलेंगे। अंतरिक्ष तकनीक का लाभ हर भारतीय तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य है।”

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