तारिक रहमान
बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) चुनावी नतीजों में बहुमत के करीब पहुंच चुकी है और पार्टी प्रमुख तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं। उनकी संभावित ताजपोशी को लेकर देश ही नहीं, बल्कि भारत में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
तो आखिर कौन हैं तारिक रहमान और भारत के साथ उनके रिश्तों की दिशा क्या हो सकती है?
पारिवारिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि
तारिक रहमान बांग्लादेश की तीन बार प्रधानमंत्री रहीं दिवंगत खालिदा जिया के बेटे हैं। खालिदा जिया के निधन के बाद पार्टी की कमान औपचारिक रूप से उनके हाथों में आई।
उनकी राजनीतिक यात्रा के मुख्य पड़ाव:
- 1988: BNP की स्थानीय इकाई से सक्रिय राजनीति की शुरुआत
- 2002: वरिष्ठ संयुक्त महासचिव नियुक्त
- 2009: वरिष्ठ उपाध्यक्ष बने
- 2018: खालिदा जिया के जेल जाने के बाद कार्यकारी अध्यक्ष
- 2025: 17 वर्षों के स्व-निर्वासन के बाद वापसी
2008 से वे लंदन में रहकर वर्चुअल माध्यम से पार्टी का नेतृत्व करते रहे। अब उनकी वापसी को BNP के पुनरुत्थान के रूप में देखा जा रहा है।
चुनावी समीकरण और मुकाबला
इस चुनाव में BNP का मुख्य मुकाबला जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन से रहा।
मुख्य बिंदु:
- BNP बहुमत के आंकड़े को पार करती दिख रही है
- गठबंधन की राजनीति अहम भूमिका में
- युवा मतदाताओं का बड़ा समर्थन
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तारिक रहमान ने पार्टी को डिजिटल और जमीनी स्तर पर फिर से संगठित किया।
51-सूत्रीय घोषणापत्र में क्या खास?
तारिक रहमान ने अपने घोषणापत्र में कई बड़े वादे किए हैं:
- लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना
- आर्थिक सुधार और रोजगार सृजन
- धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाना
- भ्रष्टाचार पर सख्ती
- पड़ोसी देशों के साथ संतुलित संबंध
घोषणापत्र में “सामूहिक प्रगति” की बात प्रमुख रूप से सामने आई है।
भारत के साथ कैसे होंगे संबंध?
भारत-बांग्लादेश संबंध हाल के वर्षों में कई उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं। विश्लेषकों के अनुसार:
- खालिदा जिया के कार्यकाल में BNP पर पाकिस्तान समर्थक और इस्लामी झुकाव के आरोप लगे थे।
- लेकिन वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में आर्थिक सहयोग दोनों देशों के हित में है।
- व्यापार, सीमा सुरक्षा और कनेक्टिविटी प्रमुख मुद्दे रहेंगे।
संकेत मिल रहे हैं कि तारिक रहमान भारत के साथ व्यावहारिक और संतुलित संबंध चाहते हैं।
संभावित प्राथमिकताएं:
- सीमा प्रबंधन में सहयोग
- व्यापार और निवेश में वृद्धि
- ऊर्जा और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट
- क्षेत्रीय स्थिरता
क्या बदल सकता है बांग्लादेश?
अगर तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनते हैं, तो देश में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं:
- विपक्षी राजनीति का पुनर्संतुलन
- प्रशासनिक सुधार
- आर्थिक नीतियों में नई दिशा
- विदेश नीति में व्यावहारिकता
हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं—सांप्रदायिक तनाव, राजनीतिक ध्रुवीकरण और क्षेत्रीय कूटनीतिक संतुलन उनके सामने बड़ी परीक्षा होंगे।