महाराष्ट्र चुनावों में महायुति की प्रचंड जीत से न केवल सत्ता पक्ष में खुशी की लहर है बल्कि उन लोगों में भी खुशी देखी जा रही है, जो चुनाव से पहले तक महायुति को हराने के लिए कभी अपना उम्मीदवार उतार रहे थे तो कभी मुखर होकर विरोध कर रहे थे। खास तौर पर उप मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को लगातार भूख हड़ताल कर परेशान किया जा रहा था। यहां बात मराठा कार्यकर्ता मनोज जारांगे की हो रही है, जो मराठा आरक्षण के लिए पिछले एक साल से सरकार पर भारी दबाव बनाए हुए थे। चुनाव के आखिरी समय तक जारांगे ने महायुति को तब और टेंशन दे दी थी, जब अपना उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर दिया था। हालांकि, उन्होंने आखिरी घड़ी में फैसला मतदाताओं पर छोड़ दिया था।
अब, जब चुनावो के नतीजे आ चुके हैं और एक बार फिर से राज्य में महायुति की सरकारबनने जा रही है, तब वही मराठा आंदोलनकारी मनोज जारांगे पाटिल गदगद नजर आ रहे हैं। इसकी वजह मराठावाड़ा क्षेत्र में महायुति को मिली बंपर जीत है। छह महीने पहले लोकसभा चुनावों में मराठवाड़ा क्षेत्र में महायुति ने आठ संसदीय सीटों में से सिर्फ एक सीट जीती थीं लेकिन विधानसभा चुनावों में छा गई है।
मराठों का गढ़ कहलाने वाले इस क्षेत्र में महायुति को 46 में से 40 सीटें मिली हैं। बड़ी बात यह है कि भाजपा ने अकेले 19 सीटें जीती हैं, जबकि एकनाथ शिंदे की सेना ने 13 और अजित पवार की एनसीपी ने 8 सीटें जीती हैं। एमवीए ने इस इलाके में सिर्फ 5 सीटें जीती हैं। इनमें 3 पर शिवसेना (यूबीटी) और एक-एक सीट पर कांग्रेस और एनसीपी (एसपी) ने जीत हासिल की। एक सीट निर्दलीय के खाते में गई है। कांग्रेस को इस इलाके में कुल सात सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है। हालिया विधानसभा चुनाव में राज्यभर में कांग्रेस को कुल 28 सीटों का नुकसान हुआ है।
चुनावी आंकड़े बताते हैं कि मराठा आरक्षण आंदोलन की वजह से ओबीसी-मराठा दुश्मनी की हवा और चर्चा भी भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति की लहर में तब्दील हो गई है। भाजपा के सभी 19 विजेताओं में सबसे ज्यादा 11 मराठा ही हैं। इसके अलावा 4 ओबीसी, 2 ST, एक SC और एक मारवाड़ी हैं। अब, महायुति की भारी जीत के बाद जरांगे-पाटिल को लुभाने वाले महायुति के नेता भी उनसे दूरी बना रहे हैं।
दरअसल, मनोज जारंगे पाटिल सालभर से आंदोलन चला रहे हैं। शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उन्हें मनाने के लिए कई बार मुलाकात की, लेकिन देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार ने कभी भी मराठा कार्यकर्ता से मुलाकात नहीं की। यही वजह थी कि मनोज जारांगे इन दोनों नेताओं से नाराज थे लेकिन अब जब मराठा समुदाय ने खुले दिल से महायुति को समर्थन दिया है तो उनकी महत्वाकांक्षाएं फिर जोर मारने लगी हैं। उन्हें उम्मीद है कि राज्य की नई सरकार उनके आरक्षण की मांग को पूरा करेगी क्योंकि मराठा समुदाय ने बड़े पैमाने पर भाजपा और उनके गठबंधन को वोट दिया है। बता दें कि मराठों को महाविकास अघाड़ी का समर्थक माना जाता था लेकिन उन्होंने इस सोच को बदल दिया है।