प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अमेरिका दौरे पर नसाऊ कोलिजियम में हजारों प्रवासी भारतीयों को सम्बोधित किया। मोदी एंड यूएस कार्यक्रम में इस दौरान 13 हजार से ज्यादा प्रवासी अमेरिका के अलग-अलग राज्यों से पीएम मोदी को सुनने के लिए जमा हुए थे। आयोजकों के मुताबिक अमेरिका के 40 राज्यों से लोग यहां इकठ्ठा हुए थे। यह प्रवासी भारतीयों के बीच पीएम मोदी की लोकप्रियता का एक उदाहरण है।
अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय प्रवासी जहां भी रहते हैं वे हर क्षेत्र में राष्ट्र के विकास में योगदान देते हैं। पीएम ने प्रवासियों को भारत का ब्रांड एंबेसडर भी बताया। पीएम मोदी अपने विदेश यात्रा के दौरान प्रवासियों से मुलाकात जरूर करते हैं और प्रवासियों के बीच भी वह उतने ही लोकप्रिय हैं। इन सब के बीच यह सवाल उठता है कि भारत प्रवासियों को इतना महत्व क्यों देता है? इसके पीछे कई कारण है।
विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 21 मई, 2024 तक भारत के बाहर 35.4 मिलियन यानी 3.5 करोड़ एनआरआई और पीआईओ (ओसीआई सहित) रह रहे हैं। इसके साथ ही भारतीय प्रवासी समुदाय दुनिया का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है। 2013 के प्यू सर्वेक्षण (Pew survey) के अनुसार, अमेरिकी आबादी (2.8 मिलियन) का केवल 1% हिस्सा होने के बावजूद भारतीय सबसे अधिक शिक्षित और सबसे धनी हैं। इसके अलावा प्रवासियों द्वारा भेजा गया 70-80 अरब डॉलर का रेमिटेंस व्यापार घाटे को संतुलित करने में मदद करता है। क्रॉस-नेशनल नेटवर्क के एक वेब का निर्माण करके, प्रवासी श्रमिकों ने भारत में सूचना, वाणिज्यिक और व्यावसायिक अवधारणाओं और प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दिया है। भारतीय विरासत के कई लोगों के पास कई देशों में उच्च राजनीतिक पद हैं और वे अब रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के साथ-साथ अमेरिकी सरकार का एक बड़ा हिस्सा हैं। प्रवासियों के राजनीतिक दबदबे को इस तथ्य से मापा जा सकता है कि इसने संशयवादी विधायकों को भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को स्वीकार करने में मदद की थी।
विदेश नीति के नजरिए से देखा जाए तो भारतीय प्रवासी भारत के लिए सॉफ्ट पावर का एक स्रोत है। मोदी सरकार प्रवासी भारतीयों से सक्रिय रूप से जुड़ने वाली पहली सरकार थी। इसने प्रवासी भारतीयों के लिए कई विशेष कार्यक्रम शुरू किए। इनमें ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया और प्रवासी भारतीय दिवस जैसी पहल शामिल हैं। पुलिसिंग से लेकर बैंकिंग और निवेश के साथ साथ कई योजनाएं विशेष रूप से प्रवासी भारतीयों के लाभ के लिए शुरू की गई है। कई सामाजिक और सांस्कृतिक पहलों ने भी प्रवासी भारतीयों को जोड़ने की कोशिश की है।
मोदी की प्रवासी भारतीयों तक पहुंच उनकी विदेश नीति से जुड़ी हुई है। मोदी एक ऐसा वैश्विक समुदाय बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो अपने मेजबान देश के प्रति वफादार हो लेकिन मूल देश की मदद के लिए हमेशा तैयार रहे। 2015 में जब मोदी ने प्रवासी भारतीयों तक पहुंच बनाना शुरू किया था तब बीजेपी नेता राम माधव ने गार्जियन में कहा था, “हम कूटनीति की रूपरेखा बदल रहे हैं और विदेशों में भारत के हितों को मजबूत करने के नए तरीकों पर विचार कर रहे हैं।” उन्होंने कहा था, “वे उन देशों में वफ़ादार नागरिक होने के बावजूद भारत की आवाज़ बन सकते हैं। प्रवासी कूटनीति के पीछे यही लक्ष्य है। यह वैसा ही है जैसे यहूदी समुदाय अमेरिका में इज़राइल के हितों की रक्षा करता है।”
सॉफ्ट पॉवर के बारे में बात करते हुए भारत के शीर्ष विदेश सेवा अधिकारी सैयद अकबरुद्दीन ने कहा था, “हमारी सॉफ्ट पावर कूटनीति अब किताबों, संस्कृति और फिल्मों से आगे निकल गई है। अब हमारे पास विदेशों में बड़ी संख्या में लोगों को सीधे तौर पर जोड़ने की क्षमता है।” अकबरुद्दीन ने बताया कि मोदी भारत के प्रवासी समुदाय में किस तरह से अपार मूल्य देखते हैं और वे भारत की विदेश नीति के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल करने के तरीके खोजते हैं।