यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की क्यों पहने रहते हैं टीशर्ट? क्या है इस निशान का सीक्रेट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में यूक्रेन दौरे पर थे और इस दौरान उन्होंने यू्क्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की से भी मुलाकात की. पीएम मोदी और जेलेंस्की की साथ में कई तस्वीरें भी सामने आईं. आपने देखा होगा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की अन्य राष्ट्रपतियों से अलग लुक में नजर आते हैं. जेलेंस्की पारंपरिक परिधान और सूट-बूट में रहने के बजाय हमेशा एक ऑलिव ग्रीन कलर की टी-शर्ट या जैकेट, ट्राउजर में दिखाई देते हैं.

लेकिन, कभी आपने गौर किया है कि जेलेंस्की जो टीशर्ट पहनते हैं, उसपर एक लोगो बना रहता है. ऐसे में सवाल है कि आखिर जेलेंस्की सूट-बूट के बजाय टीशर्ट में क्यों पहने रहते हैं. साथ ही एक सवाल ये भी है कि उनकी टीशर्ट पर बने इस निशान या लोगो का क्या मतलब है और ये इसके जरिए क्या मैसेज देने की कोशिश की जाती है. 

पहले तो आपको बता दें कि ऐसा नहीं कि जेलेंस्की हमेशा से ऐसे ही लुक में रहते हैं. आप इंटरनेट पर सर्च करेंगे तो आपको उनकी सूट पहने हुए कई फोटो दिखाई देंगी. लेकिन, कुछ वक्त से जेलेंस्की ने अपना लुक बदल लिया है और इसकी वजह मानी जाती है यूक्रेन और रूस की जंग. जी हां, यूक्रेन और रूस की जंग के बाद से जेलेंस्की इसी लुक में दिखाई देते हैं और माना जाता है कि युद्ध के बाद से जेलेंस्की एक कॉमन मैन की तरह टीशर्ट-ट्राउजर पहने रहते हैं. 

दरअसल, जेलेंस्की के लिए कहा जाता है कि सहानुभूति और दुनिया के सामने यूक्रेन के फेस की वैल्यू को अच्छे से समझते हैं. वे जानते हैं कि रूस और यूक्रेन वॉर में जनता की राय अहम है और उनसे जुड़ा रहना जरूरी है. अब जेलेंस्की अपने साथी सैनिकों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए एक साधारण हरे रंग की टी-शर्ट पहनते हैं, जो यूक्रेन की जंग में अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं. साथ ही वे कैजुअल लुक से यूक्रेन के आम लोगों से खुद को कनेक्टेड दिखाते हैं और सिंप्लीसिटी का मैसेज भी देते हैं.

इस त्रिशूल जैसे लोगो का नाम है, जो यूक्रेनी वोलिया का प्रतीक है. इसका मतलब है किसी भी चीज को लेकर फ्रीडम या विश्वास. ये फ्रीडम विचार, विश्वास और कार्य किसी की भी हो सकती है. साल 1918 में यूक्रेनी पीपुल्स रिपब्लिक सरकार ने राज्य के प्रतीक के रूप में इसे मंजूरी दी थी. 

ये कीव से जुड़ा एक पुराना सिंबल है, जिसे यूक्रेन की एकता के लिए चुना गया था. इस लोगो में ही फ्रीडम की बात कही गई है. बता दें कि साल 19 फरवरी 1992 को यूक्रेनी संसद ने इसे स्टेट एंबलम के रुप में मान्यता दी थी. माना जाता है ये सिंबल रुरिक राजवंश (10वीं-12वीं शताब्दी) का पैतृक चिन्ह था. फिर ये उन लोगों का प्रतीक बन गया, जिन्होंने 100 साल पहले यूक्रेन की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी और जो आज अग्रिम पंक्ति में इसकी रक्षा करते हैं. 
 

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